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डॉक्टर बहन ने शहीद भाई को समर्पित की पुस्तक

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रोहित कौशल। (फाइल फोटो) - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। करीब 27 साल पहले उग्रवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुई भाई को डॉक्टर बहन आज भी अपनी किताब के जरिये लोगों के जहन में जिंदा रखे हुए है। इतना ही नहीं यह बहन करीब 26 साल से भाई के नाम की राखी भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को बांधती आ रही है। बहन का मानना है भगवान इस राखि को उसके भाई तक पहुंचा रहे हैं।
शहीद की बहन डॉ. शुभा कौशल वर्तमान में श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में शरीर क्रिया विभाग में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। हाल ही में उन्होंने आयुर्वेद में अपने लंबे अनुभव के बाद एक पुस्तक लिखी है, जिसे अपने शहीद भाई कैप्टन रोहित कौशल को उनके 54वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि रूप में समर्पित किया है। इस पुस्तक में एक पन्ने पर शहीद रोहित कौशल की गौरव गाथा लिखी है।
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डॉ. कौशल बताती हैं कि जब उनके भाई शहीद हुए तो वह करीब 23 साल की थीं। दोनों का आपस में बहुत लगाव था। भाई जब भी छुट्टी पर घर आते थे तो उन्हें देश और सैनिकों की बातें बताते। भाई में बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा था। आज भी उनकी कही एक-एक बात उन्हें अच्छे से याद है। कैप्टन रोहित का जन्म पांच अगस्त 1968 को अंबाला छावनी में हुआ था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर सीडीएस की परीक्षा पहले प्रयास में ही पास कर के नौ जून 1990 को सेना में कमीशन पाया। इन्फैंट्री में जाने की उनकी मांग थी जो उन्हें 18 पंजाब रेजिमेंट में ले गई और वहां से भारत सरकार ने उन्हें 12 राष्ट्रीय राइफल्स में प्रतिनियुक्ति दे दी।
रोहित कौशल की पोस्टिंग जम्मू के डोडा के गंडोह क्षेत्र में थी और वे कंपनी कमांडर थे। 10 नवंबर की रात की मुठभेड़ से पहले भी कैप्टन कौशल ने उग्रवादियों से लोहा लिया। वह दो बार बाल-बाल बचे थे। 10 नवंबर की रात जब उन्हें पता चला कि उनके क्षेत्र में उग्रवादियों का गिरोह आ गया है तो जवानों की पार्टी की अगुवाई करते हुए उन्होंने उनका पीछा किया। कई घंटे चली मुठभेड़ के आखिर में छाती और गर्दन में गोलियां लगने से वह शहीद हो गए। खून से लथपथ भारत माता के इस वीर सपूत ने गिरते हुए भी दो उग्रवादियों को ढेर कर दिया। भारत सरकार ने शहीद को मरणोपरांत शौर्य अवार्ड से सम्मानित किया।
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अपनी यूनिट से ही होती फौजियों की शादी
डॉ. कौशल बताती हैं जब कभी घर में शादी की बात चलती तो रोहित हमेशा यही कहते कि हम फौजियों की शादी अपनी यूनिट से ही होती है। 27 नवंबर 1995 को रोहित की शादी होनी थी, उन्हें 15 नवंबर को छुट्टी पर आना था, लेकिन उससे पहले चार दिन पहले उनके शहीद होने की खबर आई। 10-11 नवंबर 1995 की रात को रोहित उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।

डॉ. शुभा कौशल।- फोटो : Kurukshetra

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