कुरुक्षेत्र। एक सप्ताह पहले ही सीएम सिटी बनी धर्मनगरी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। 20 साल बाद धर्मनगरी को प्रदेश सरकार में मंत्री के तौर पर हिस्सेदारी मिली है, जिससे सियासी कद एक बार फिर बढ़ गया है। इससे पहले अशोक अरोड़ा इनेलो सरकार में परिवहन मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष भी रहे थे। वे फिलहाल कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
12 मार्च को जैसे ही सांसद नायब सैनी मुख्यमंत्री बने थे तो पूरे प्रदेश नजरे धर्मनगरी पर टिक गई थी। उसी समय से ही विधायक सुभाष सुधा के भी मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे थे और जैसे ही मंगलवार को उन्होंने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के तौर पर शपथ ली तो खुशी की लहर दौड़ गई। सांसद रहते हुए नायब सैनी के साथ विधायक सुभाष सुधा के रहे बेहतर संबंधों के चलते ही चर्चा की जाने लगी थी कि नई जिम्मेदारी के साथ उनका राजनीतिक कद बढ़ सकता है। धर्मनगरी में सांसद व विधायक बड़े व छोटे भाई के तौर पर चर्चा में रहने लगे थे। यहां तक कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों अक्सर एक ही साथ व एक ही गाड़ी में भी दिखाई देते थे।
अब मुख्यमंत्री भी हमारा, मंत्री भी
लोगाें का कहना है कि अब मुख्यमंत्री भी हमारा है और मंत्री भी। पहली बार धर्मनगरी को सीएम सिटी होने का गौरव मिल पाया है तो वहीं अब स्थानीय विधायक को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अब लोकसभा चुनावों के बाद विकास कार्यों की गाड़ी और तेज दौड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं माना जा रहा है कि सुभाष सुधा का पंजाबी नेता के तौर पर कद बढ़ा है।