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Kurukshetra News: चुनावी शंखनाद होेते ही हॉट सीट बनी धर्मनगरी

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सेवा सिंह
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कुरुक्षेत्र। हजारों वर्ष पहले कुरुक्षेत्र की धरा पर धर्म-अर्धम को लेकर महाभारत हुआ था, जिसका जिक्र आज भी हर व्यक्ति की जुबान पर है। यही धरा अब फिर महाभारत के लिए तैयार है। यह महाभारत चुनावी होगी, जिसका शंखनाद हो चुका है तो मैदान भी सजने लगा है, जिसके साथ ही सियासी पार्टियों ने भी इस धरा पर अपनी-अपनी जीत के लिए निगाहें टिका ली है। बड़े-बड़े दावों से लेकर दमखम के साथ अपने-अपने योद्धा उतारे जाने लगे हैं।
अभी तक मुख्य तौर पर दो बड़े योद्धा मैदान में आ चुके हैं, जिससे आधी तस्वीर साफ हो चुकी है तो वहीं आधी तस्वीर भाजपा के योद्धा मैदान में आने के बाद साफ होगी। अब हर जन को इस योद्धा के आने का इंतजार है, जिसके बाद पूरी तस्वीर साफ होगी। इसके बाद इस चुनावी जंग में कौन जीत हासिल करता है यह परिणाम आने पर पता चलेगा, लेकिन हर किसी के लिए यहां जीत प्रतिष्ठा का सवाल होगी।
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यह सामान्य नहीं बल्कि हॉट सीट बन चुकी है, जिसके जरिए लोकसभा नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने का मार्ग सियासी पार्टी खोजना चाहती है। सबसे पहले इंडिया गठबंधन ने अपने चुनावी योद्धा सुशील गुप्ता को मैदान में उतारा है। पहली बार इस मैदान में आए सुशील गुप्ता ने भी अपनी जीत के लिए पसीना बहाते हुए पूरी ताकत भी झोंकनी शुरू कर दी है। जहां डॉ. सुशील गुप्ता को सांसद बनाकर इंडिया गठबंधन सहयोगी आम आदमी पार्टी अगले विधानसभा चुनावों पर निशाना साधे हुए हैं।
गठबंधन के तहत एकमात्र सीट ले पाई आप के सुप्रीमो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर पार्टी के पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए भी यहां से अपने प्रत्याशी को जिताना प्रतिष्ठा का सवाल होगा और इसी के चलते ही इसी धरा पर पहुंचकर हाल ही में दोनों मुख्यमंत्री जीत का चक्रव्यूह भी तैयार कर चुके हैं। उधर, भले ही कांग्रेस के प्रति कुछ अलग धारणा हो लेकिन यह भी माना जा रहा है कि इस एकमात्र सीट पर आप का पूरा सहयोग कर अन्य नौ सीटों पर आप का भरपूर फायदा उठाया जाए।
उधर इनेलो के ऐलानाबाद विधायक अभय चौटाला यहां से दूसरी बार मैदान में उतरे हैं। वर्ष 2004 में कांग्रेस के नवीन जिंदल से करीब एक लाख 60 हजार वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था तो गत 2019 के चुनावों में उनके बेटे अर्जुन चौटाला को करीब 60 हजार वोट ही मिल पाई थी। अभय चौटाला पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र है तो राजनीतिक तौर पर उनका अपना बड़ा महत्व भी है। ऐसे में वे इस बार यहां काेई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे तो वहीं पार्टी के लिए भी इसी चुनाव का अगले विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा संदेश जाने वाला है।


मुख्यमंत्री नायब सैनी भी झोंकेंगे पूरी ताकत
हालांकि अभी भाजपा के चुनावी योद्धा के आने का इंतजार है, लेकिन यहां पर चुनाव हाल ही में मुख्यमंत्री बने नायब सिंह सैनी के लिए भी बेहद अहम होगा। पार्टी का योद्धा कोई भी हो, लेकिन यहां की जीत व हार के बड़े मायने निकलने वाले हैं। सांसद के तौर पर जहां नायब सैनी की यह धरा कर्मभूमि है वहीं अब सीएम सिटी होने के चलते यहां की जीत व हार का बड़ा संदेश निकलने वाला है और इसका सीधा असर अगले विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत देखा जाएगा।
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जिंदल परिवार से मैदान में उतारे जाने की चर्चा
भले ही भाजपा के कई स्थानीय नेताओं ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है लेकिन कई दिनों से चर्चा यही है कि इस बार जिंदल परिवार से ही भाजपा की ओर से कोई सदस्य मैदान में उतारा जा सकता है। दो दिनों से ये चर्चा और तेज हुई है, जिसमें पूर्व सांसद नवीन जिंदल से लेकर उनकी पत्नी शालू जिंदल का भी नाम लिया जा रहा है। अगर ये मैदान में आए तो भाजपा के साथ-साथ उनके लिए भी यहां से जीत हासिल करना बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल होगी।
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