कुरुक्षेत्र। सावन माह की सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी के पवित्र ब्रह्मसरोवर पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं में गहरी आस्था दिखाई दी। जिले भर में साेमवती अमावस्या के चलते अल सुबह ही श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी के पवित्र ब्रह्मसरोवर, पिहोवा के सरस्वती तीर्थ सहित कई अन्य स्थानों पर स्नान किया और सूर्य को जल अर्पित कर पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने घाटों पर स्नान कर अपने पूर्वजों को मोक्ष के लिए पिंडदान, गति व पूजा अर्चना कराई। तीर्थ स्थलों पर दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।
सावन माह की सोमवती अमावस्या को लेकर केडीबी की ओर से कड़े बंदोबस्त किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर केडीबी की ओर से बार-बार सूचनाएं दी जा रही थी। जहां पुलिस प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जांच की जा रही थी तो वहीं साेमवती अमावस्या को लेकर धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं की ओर से कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया था, जिसमें भजन, कीर्तन के पश्चात दूर दराज से आए श्रद्धालु भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर रहे थे।
दूध के दान का विशेष महत्व
पंडित प्रेम कुमार शर्मा का कहना है कि सावन माह की अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थ स्थलों में स्नान कर भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए और पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए दूध और दूध से बने पकवान जरूरतमंद लोगों को वितरित करने चाहिए।