संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। प्रख्यात चैत्र चौदस मेले में आने वाले श्रद्धालु अपने जोखिम पर आएं, क्योंकि स्थानीय प्रशासन अपने जिम्मेदारी से भाग रहा है। सूर्यग्रहण मेले पर श्रद्धालुओं का दो लाख तक का बीमा कराने वाले प्रशासन ने चैत्र चौदस मेले पर अपने हाथ बांध रखे है। चैत्र चौदस मेले पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं का बीमा नहीं कराया है। इससे कोई अनहोनी होने पर श्रद्धालु खुद ही भुगतेंगे।
उल्लेखनीय है कि 30 मार्च से चैत्र चौदस मेले का आरंभ होने जा रहा है। इस मेले में छह लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन तमाम सुविधाएं देने का दावा कर रहा है, मगर मेले में प्रशासन की एक बड़ी चूक हमेशा से होती आई है। इससे एक, दो या तीन नहीं बल्कि मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं प्रभावित होते हैं।
प्रशासन की तरफ से चैत्र चौदस मेले में आने वाले किसी भी श्रद्धालुओं को जीवन बीमा मुहैया नहीं कराया जाता। दुर्भाग्य से मेला क्षेत्र में कोई दुर्घटना हुई तो उससे सबसे ज्यादा श्रद्धालु ही प्रभावित होंगे, मगर ऐसी स्थिति में प्रशासन की ओर दुर्घटना के शिकार श्रद्धालुओं को बीमा का फायदा नहीं मिलेगा। चैत्र चौदस मेले में अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई श्रद्धालु अपनी जान से भी हाथ धो बैठे हैं। हालांकि हरियाणा में आयोजित होने वाले कई मेेलों में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं का बीमा किया जाता है। कुरुक्षेत्र में ही ब्रह्मसरोवर और सन्निहित पर होने वाले मेले और महोत्सव में श्रद्धालुओं को बीमा मुहैया कराया जाता है।
कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर में लगने वाले सूर्यग्रहण मेले पर आने वाले श्रद्धालुओं का दो लाख रुपये तक का बीमा कराया जाता है। यहां तक कि गीता जयंती महोत्सव में भी श्रद्धालुओं का बीमा होता है। केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन मोहन छाबड़ा ने बताया कि प्रशासन की लापरवाही नहीं जिम्मेदारी होती है। मेला क्षेत्र में दुर्घटना का शिकार होने पर श्रद्धालुओं को दो लाख रुपये तक का बीमा दिया है। सूर्य ग्रहण मेला और गीता जयंती महोत्सव ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर आयोजित किए जाते हैं। दोनों अवसर पर श्रद्धालुओं का बीमा होता है। वहीं यमुनानगर में कपाल मोचन मेले में भी आए श्रद्धालुओं को बीमा किया गया था।
चैत्र चौदस मेले में हुई यह दुर्घटनाएं
साल 2014 में चैत्र चौदस मेले के दौरान सरस्वती सरोवर में नहाते समय 27 वर्षीय परमजीत सिंह (पंजाब) की डूबने से मौत हो गई थी। इसके अगले ही साल मेला क्षेत्र में झूला ग्राउंड में किश्ती वाला झूला टूटने से पांच लोग घायल हो गए थे। साल 2019 में 55 वर्षीय प्यारा सिंह निवासी पबात (जीरकपुर) संतुलन बिगड़ने से स्वर्ग आश्रम के पास सरस्वती नदी में डूब गए थे। प्यारा सिंह नदी में स्नान के लिए उतारे थे। साल 2020 और 21 में कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने मेले पर पाबंदी लगा दी थी।
बीमा के मामले की नहीं जानकारी : सोनू राम
एसडीएम सोनू राम ने बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का जीवन बीमा करने संबंधित मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले की जानकारी जुटाई जाएगी। उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।