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तीसरे दिन पीर बडौली यमुना नहर के किनारे मिला दीपक का शव, प्रशांत की तालाश देर रात तक रही जारी

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कुरुक्षेत्र। गांव पीर बडौली यमुना नहर पर मृतक दीपक के पिता अश्वनी भारद्वाज से बातचीत करते समाजस? - फोटो : Kurukshetra
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लाडवा। वार्ड नंबर 13 के दीपक का शव आखिरकार तीसरे दिन मंगलवार देर सांय उत्तरप्रदेश के पीर बडौली यमुना नहर से मिला। सांय को यमुना नहर के किनारे एक कुत्ता बार-बार चक्कर काट रहा था। तब ग्रामीणों व गोताखोरों को शक हुआ कि यहां पर जरूर कुछ मिलेगा और उन्होंने तलाश जारी की तो दीपक का शव यमुना के अंदर था।
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वार्ड नंबर 13 के वासी अश्वनी भारद्वाज ने बताया कि मंगलवार शाम को उनको उनके बड़े बेटे दीपक का शव यमुना में से मिल गया है। जिसको करनाल के कल्पना चावला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह हरियाणा सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार दोनों से ही खफा है। क्योंकि दोनों ही सरकारों व प्रशासन ने उनकी व उनके परिवार की कोई मदद नहीं की केवल दिखावे के आश्वासन व झूठे वादे ही किए गए। सिर्फ गांववासियों व गांव पीर बडोली के सरपंच अशोक कुमार द्वारा उनकी मदद की गई है। उन्होंने कहा कि जो नाव मंगाई गई थी, उसके अंदर तेल तक भी नहीं था। जो कि उन्होंने स्वयं डलवाकर यमुना के अंदर भिजवाया और एक कुत्ता बार-बार यमुना के घाट पर जा रहा था। जिसके कारण लोगों को शक हुआ कि यहां पर जरूर कुछ न कुछ मिलेगा और उसके बाद तलाश जारी की तो उनके बड़े बेटे दीपक का शव उनकी आंखों के सामने गांववासी यमुना में से निकालकर लेकर आए।
गौरतलब है कि रविवार सुबह लाडवा के वार्ड नंबर 13 के अश्वनी भारद्वाज अपने दोनों बेटे दीपक व प्रशांत के साथ बीड़ बडोली यमुना पर पीर की मजार पर माथा टेकने के लिए गए थे, जिसमें उनका बड़ा बेटा दीपक यमुना में बह गया था। जिसको देखकर उनके छोटे बेटे प्रशांत ने भी यमुना में छलांग लगा दी थी और वह भी स्वयं यमुना में कूद गए थे। परंतु उन्होंने एक पेड़ को पकड़ लिया था वह तो बाहर आ गए थे और उनके दोनों बेटे यमुना में बह गए थे। प्रशांत की अभी भी तलाश जारी रही। वहीं मंगलवार शाम को स्टालवार्ट फाउंडेशन के चेयरमैन एवं समाजसेवी संदीप गर्ग भी लाडवा से गांव पीर बडौली यमुना नहर पर अपनी टीम के साथ परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। जहां पर जाकर संदीप गर्ग ने मृतक दीपक के पिता अश्वनी भारद्वाज से बातचीत की व उन्हें सांत्वना दी।
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