थीम पार्क में चल रहे 10 दिवसीय 501 कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ में धर्म व भारतीय संस्कृति विषय पर संत, महंत व महामंडलेश्वरों के बीच चर्चा हुई। उन्होंने भारतीय संस्कृति को सार्वभौमिक सत्य बताया। शनिवार सुबह यजमान ने अपने यज्ञ कुंड में तथा संत-महात्माओं ने प्रधान कुंड में आहुतियां डाली। वहीं पूर्व संध्या पर महाआरती में डीसी मुकुल कुमार, पुलिस अधीक्षक धीरज कुमार सेतिया, कांग्रेस नेता जलेश शर्मा, उद्योगपति अश्वनी जैन सहित अन्य यजमानों ने हिस्सा लिया। गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति जीवन-दर्शन, व्यक्तिगत और सामुदायिक विशेषताओं, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान के विकास क्रम, विभिन्न समाज, जातियों के कारण बहुत विशिष्ट है। इसमें भिन्नता-विभिन्नता सहज और स्वाभाविक है। हमारी भारतीय संस्कृति सार्वभौमिक सत्यों पर खड़ी है। इस कारण वह सब ओर गतिशील होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का विकास धर्म का आधार लेकर हुआ है इसीलिए उसमें दृढ़ता है। भारतीय संस्कृति व्यक्ति को व्यक्तित्व देती है और उसे महान कार्यों के लिए प्रोत्साहित करती है किंतु व्यक्तित्व का चरम विकास यह सामाजिक स्तर पर ही स्वीकार करती है। भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति है। अन्य देशों की संस्कृतियां तो समय की धारा के साथ-साथ नष्ट होती रही हैं मगर भारत की संस्कृति आदिकाल से ही अपने परंपरागत अस्तित्व के साथ अजर-अमर बनी हुई है। कार्यक्रम में यज्ञ सम्राट हरिओम, महामंडलेश्वर डॉ. प्रेमानंद, महामंडलेश्वर विकास दास मोहड़ा धाम, आयोजन समिति के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा गोल्डी, राहुल तंवर व सतपाल द्विवेदी सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।