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नाटक पंचलाइट ने खूब गुदगुदाया, कलाकारों के अभिनय ने किया कायल

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जिंदगी में हंसना बेहद जरूरी है। बिना हास्य के जीवन नीरस हो जाता है। एक ओर जहां हास्य तनाव को दूर करता है, वहीं लोगों के अंदर स्फूर्ति भी पैदा करता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला कला कीर्ति भवन के ओपन एअर थियेटर में। मौका था न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के 13वें वार्षिक उत्सव के दौरान मंचित हास्य नाटक पंचलाइट का। हरियाणा कला परिषद और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय उत्थान उत्सव के पहले दिन कुरुक्षेत्र के रंगकर्मी विकास शर्मा के निर्देशन में फणीश्वर नाथ रेणू की बहुचर्चित कहानी पंचलाइट को बहुत ही रोचक ढंग से मंचित किया गया।
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इस मौके पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे। विशिष्ट अतिथि ब्रहमचारी रोहित जी रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी जयभगवान सिंगला ने की। हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू तथा न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के अध्यक्ष नीरज सेठी ने अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर किया। इस मौके पर डॉ. मोहित गुप्ता ने मंच संचालन किया।
नाट्य दल न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप द्वारा विकास शर्मा के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक पंचलाइट में बिहार के एक छोटे से गांव की कहानी को दिखाया गया। उस समय गांव में बिजली नहीं होती थी। गांव के बामन टोली के पास खुद की खरीदी हुई पंचलाइट थी, तो महतो टोली के लोगों ने भी दंड और जुर्माने के पैसे इकट्ठे करके पंचलाइट खरीद ली। जब शहर से पंचलाइट गांव में आती है तो खूब खुशियां मनाई जाती हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि गांव के किसी भी व्यक्ति को पंचलाइट जलानी नहीं आती। गांव का एक आवारा लड़का गोधन जो पढ़ा लिखा है, उसे ही पंचलाइट जलानी आती है। गोधन गांव की ही लड़की मुनरी से प्यार करता है, लेकिन मुनरी से प्यार करने वाले कल्लू को ये अच्छा नहीं लगता और वह मुनरी की अम्मा को सब बता देता है। मुनरी की अम्मा पंचायत बुला लेती है, जिसमें फैंसला होता है कि गोधन का हुक्का पानी बंद कर दिया जाए। इस प्रकार गोधन और मुनरी का मिलना जुलना बंद हो जाता है। पंचलाइट आने पर मुनरी सबको बताती है कि गोधन को पंचलाइट जलानी आती है। सरपंच गोधन को बुलवाकर पंचलाइट जलाने के लिए कहता है, लेकिन गोधन शर्त रखता है कि यदि मुनरी से उसका ब्याह करवाया जाए, तभी वह पंचलाइट जलाएगा। पंचायत उसकी बात मान लेती है और गोधन का मुनरी से ब्याह करवाने का वादा करती है। तब गोधन पंचलाइट जला देता है और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है। इस प्रकार नाटक अशिक्षा पर कटाक्ष करता है। गोधन का किरदार राजीव कुमार तथा मुनरी का किरदार महक माल्यान ने निभाया। अन्य कलाकारों में पारुल कौशिक, शिवकुमार किरमच, गौरव दीपक जांगड़ा, आकाशदीप, ज्योति बांकुरा, जैकी शर्मा, अनूप कुमार, चंचल शर्मा, निकेता शर्मा, तुषार, साहिल खान, पार्थ, चमन चौहान, गोविंदा, आशुतोष मिश्रा आदि रहे।
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