कुरुक्षेत्र। लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक रही सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिए प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार की ओर से भी बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल ये दावे हकीकत से कोसों दूर दिखाई दे रहे हैं। सरस्वती नदी आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। न इसमें बहने वाले दूषित पानी को आज तक रोका जा सका है और न ही इसकी सफाई ही की जा सकी है।
हालात यह है कि मानसून सीजन से पहले की बारिश को भी यह नदी झेल नहीं पाई और शहर से ही सटे करीब सौ एकड़ खेत इस नदी के ओवरफ्लो होने से पानी में डूब गए। इससे जहां कई किसानों को नुकसान हुआ है वहीं इन किसानों में रोष भी बना हुआ है। किसानों की मानें तो सरस्वती ओवरफ्लो होने से पशुओं के लिए बिजाई की गई चारे की फसल नष्ट हो गई तो वहीं भूसे के कूप भी इसकी चपेट में आ गए हैं। ये हालात देखकर हर कोई हैरान है। लोगों का कहना है कि जब नदी के हालात अभी ये यह है तो बारिश के सीजन में यह और भी गंभीर होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
शहर में भी नहीं कराई जा सकी सफाई
फिलहाल सरस्वती नदी लंबे समय से की जाती रही अनदेखी के चलते नाले के रूप में सिमट कर रह गई। जहां लोग घरों से लेकर पशु डेयरी तक का दूषित पानी व गंदगी इसमें बहा रहे हैं वहीं अवैध कब्जे तक किए हुए हैं। प्रशासन नदी के शहरी क्षेत्र में भी आज तक न अवैध कब्जे हटवा सका है और न ही सफाई ही कराई जा सकी। ऐसे में आगे ज्यादा बारिश होने पर रिहायशी क्षेत्रों में भी इससे पानी भरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फसल डूबी, अब कौन होगा जिम्मेदार : जसमेर
किसान जसमेर सिंह ने बताया कि सरस्वती ओवरफ्लो होने से करीब 100 एकड़ खेत पानी में डूब गए हैं। इसमें उनके खेत भी शामिल है, जिसमें पशु चारे की बिजाई की हुई थी। अब इस नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा।
सफाई के लिए टेंडर जारी, जल्द शुरू होगा काम : कौशिक
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता अरविंद कौशिक का कहना है कि सरस्वती की सफाई के लिए योजना बनाई है, जिसके तहत कुछ क्षेत्र में मनरेगा के तहत तो कुछ में मशीन से सफाई करवाई जानी है। इस कार्य के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं और एक सप्ताह तक यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा।