अमर उजाला ब्यूरो
पिहोवा। फर्जी बिलों के आधार पर घोटाला किए जाने को लेकर चर्चा में आई सीएचसी में लैब टेस्ट के सामान, आशा वर्कर ट्रेनिंग सहित कई अन्य मामलों में भी घोटाला होने की आशंका जताई जा रही है। इसमें सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाया गया है। यह खुलासा होने से सीएचसी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
सीएचसी की मार्च 2018 की एसकेएस एक्सपेंसिव की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें लाखों रुपये का घोटाला होने की आशंका दिखाई दी है, जिससे देख एसएमओ भी हैरत में हैं और उन्होंने इसकी जांच व कार्रवाई के लिए विभाग को पत्र भेजा है। हैरत की बात यह है कि सीएचसी से अभी इससे पहले की रिपोर्ट गायब हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह गोलमाल पिछले कई साल से चल रहा है। एसएमओं की मानें तो मार्च 2018 की रिपोर्ट के अनुसार सीएचसी और पीएचसी पर एक करोड़ पांच लाख चालीस हजार रुपये से ज्यादा का का खर्च दर्शाया गया है। इस रिपोर्ट में पिहोवा सीएचसी व पीएचसी के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन सहित अनेक स्थायी खर्च शामिल हैं।
आशा वर्कर्स की ट्रेनिंग में हुआ घोटाला
साल 2017-18 की रिपोर्ट में आशा वर्कर की ट्रेनिंग पर पांच लाख तीस हजार रुपये से ज्यादा का खर्च किया गया है। मामले में एसएमओ ललित कलशन के अनुसार एक साल में आशा वर्कर ट्रेनिंग पांच लाख का भी खर्च नहीं हो सकता है। इसमें गोलमाल किया गया है। फिलहाल यह जांच का विषय है।
टेस्ट सामान पर खर्च पीजीआई की लैब से ज्यादा
आशा वर्कर की ट्रेनिंग के बाद लैब टेस्ट के सामान में भी घोटाला के हुआ है। इसका जिक्र एमएमआईवाई रिपोर्ट में है। रिपोर्ट के अनुसार लैब टेस्ट के सामान का खर्च एक माह का 80 हजार रुपये दर्शाया गया है। यह खर्च पीजीआई की लैब से भी ज्यादा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह सामान कैथल से खरीदा जा रहा है, जबकि कैथल लैब टेस्ट के सामान का कोई बड़ा क्षेत्र नहीं है। एसएमओ ललित कलशन ने बताया कि लैब टेस्ट के सामान में ज्यादातर सामान डिलीवरी से संबंधित होता है। इसमें गर्भवती स्त्रियों के 6 प्रकार के टेस्ट का सामान शामिल है। सीएचसी में हर माह 35 से 40 डिलीवरी होती हैं। 100 डिलीवरी केस होने पर भी 20 हजार रुपये से ज्यादा खर्च नहीं होना चाहिए, लेकिन यहां ये खर्च से 4 गुणा अधिक बताया गया है। उधर, सीएचसी में वैक्सीन घोटाला होने के आसार भी नजर आ रहे हैं।
कार्रवाई के लिए भेजी शिकायत : एसएमओ
एसएमओ डॉ. ललित कलसन ने बताया कि मामले में उचित कार्रवाई के लिए लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों को भेजी गई। फिलहाल इन मामलों की जांच चल रही है। सरकार की ओर से आए फंड को जनहित के कार्यों में ही खर्च किया जाना चाहिए। इसमें फर्जीवाड़ा करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी जरूरी है।