गांव मैं यो एक कुणबे की घटना है, पर देस मै म्हारे गांव पै दाग लगा दिया
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गांव मैं भले यो एक कुणबे की घटना है, जिस तै पूरा गांव दुखी है, पर इस करतूत नैं तो पूरे देस मै म्हारे गांव पै दाग ला दिया। यो देख सुण कै, के कवैंगे लोग, सारसा मैं ऐसे दरिंदे रवैं...। ये पीड़ा 90 वर्ष के पंडित रघुनाथ शर्मा की थी। उनका कहना था कि हमनै ईब तक की जीवन में गांव और आसपास भी ऐसी घिनौनी घटना ना कभी देखी थी और ना अब तक सुनी। बुधवार को गांव में सूचना पहुंची थी कि समीर, सिमरन और समर के शव दोपहर करीब एक बजे तक पहुंचेंगे। इससे पहले ही गांव में स्थित सभी दुकानें बंद हो चुकी थीं। गांव के हर मोड़, गली और घरों के बाहर चबूतरों पर लोगों का जमावड़ा लगा था।
गांव के लोगों के अलावा आसपास इलाके के लोग भी तीनों बच्चों की हत्या की जानकारी पाकर उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे। जबरदस्त भीड़ के बाद भी गांव में सन्नाटा पसरा था। कोई आवाज थी तो वो सिर्फ तीन बच्चों के घर और गली में विलाप करतीं महिलाओं की। गांव में जमा लोग धीमी आवाज में इस हत्याकांड पर अपने-अपने द़ष्टिकोण से चर्चा करते हुए बच्चों के पिता सोनू और चाचा जगदीप को धिक्कारते रहे। गांव में चर्चा है कि हत्यारोपी जगदीप के घर में पिछले चंद वर्षों में छह अकाल मौतों को लेकर भी हुई। इनमें तीन हत्यारों का खुलासा हो चुका है। गांव सारसा में आज यह चर्चा आम थी कि जगदीप के पिता धर्म सिंह की दूसरी पत्नी के अलावा एक बेटी की भी संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। इसके बाद करीब दो साल पहले जगदीप के सगे छोटे भाई बिंदर की लाश घर में ही फंदे से लटकी मिली थी।
रहट से ट्यूबवैल तक का दौर देखा, पर ऐसा नहीं देखा
जाट समुदाय से संबंधित गांव सारसा निवासी करीब 55 वर्षीय किसान रामफल बच्चों की हत्या से विचलित दिखे। बात करते हुए उनकी आंखों में पानी था। रामफल बोला मैने जब होश संभाला तब खेती रहट चलाकर होती थी। वर्तमान में ट्यूबवैल से खेती हो रही है। इतना सब देख चुका हूं, लेकिन ऐसा घटनाक्रम म्हारे गांव में पहली बार हुआ है।
नमस्ते दादा जी, नमस्ते ताऊ जी....
गांव में दूध के डेयरी के बाहर बैठे लोग समीर, सिमरन और समर से जुड़ी यादों को दोहरा रहे थे। बोल रहे थे कि वे जब भी गली से आते जाते तो नमस्ते दादाजी, नमस्ते ताऊ जी और चाचा जी कहे बिना आगे नहीं बढ़ते थे। इन तीनों भाई बहनों की वो भोली सूरते आज भी आंखों में समाई हुई है। तीनों एक साथ खेलते और आते जाते दिखते थे।
पुरखों की चार एकड़ से पिता ने बनाई थी 24 एकड़ जमीन
गांव वालों ने बताया कि सोनू और उसके चचेरे भाई जगदीप के पास 25 एकड़ भूमि थी। सोनू के पिता जीता मलिक और जगदीप के पिता धर्म सिंह के पास पुरखों की सिर्फ चार एकड़ भूमि थी। इन्होंने अपने बच्चों के लिए एक-एक एकड़ जोड़ कर 25 एकड़ जमीन कर ली थी। किसी को क्या पता था कि कुल के दीपक ही बुझा दिए जाएंगे।
बड़ी मन्नतों के बाद 20 साल बाद हुआ था सोनू का जन्म
पंचकूला में पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तीनों बच्चों के शव सारसा गांव पहुंचे थे। दादा जीता में भी गांव के लोगों के साथ पंचकूला से यहां जब पहुंचा तो परिवार के गले लगकर रोते-रोते बेसुध हो गया। गांव का एक बुजुर्ग जीता राम को संभालते हुए रोते हुए बोला कि जिसे मन्नतों के बाद 20 साल बाद पाया, उसी ने सब कुछ खात्म कर दिया। गौरतलब है कि सोनू अपने माता पिता का एकलौता पुत्र है। उसने अपने भाई धर्म सिंह क्भ् एक बेटी को भी गोद लिया हुआ था।
शव देखते ही बेहोश हो गई बुआ
सोनू के पिता की गोद ली गई बेटी और जगदीप की सगी बहन सोनिया तीनों बच्चों के शव देखने के बाद बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। तीनों शवों के पास जमा हुई भीड़ ने उसे उठाकर जगदीप के घर पहुंचाया। उसकी हालत बिगड़ने पर डॉक्टर को बुलाया गया।
छोटे पर नहीं चलाई थी गोली, फोन आया, फिर मारा था समीर को
मोरनी में मंगलवार को जिस जगह से समीर और सिमरन के शव बरामद हुए थे, उसके करीब डेढ़ किलोमीटर दूर समर का शव पुलिस ने बरामद किया। बताया गया है कि जगदीप ने समीर और सिमरन की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद चार साल के समर को मारने में उसका हाथ कांप गया। इसके बाद वह घटनास्थल से करीब डे़ढ किलोमीटर दूर आ गया। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि जगदीप ने चार साल के समर की भी हत्या कर दी।
धर्म सिंह की तीसरी विवाहिता का पुत्र था जगदीप
जगदीप के पिता धर्म सिंह अब जीवित नहीं है। गांव वालों के मुताबिक धर्म सिंह ने अपने जीवन में तीन शादियां कीं। इनमें पहली विवाहिता को उसने छोड़ दिया था। दूसरी विवाहिता से उसे एक बेटी हुई थी। घर में ही रहस्यमी परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। इनमें बच्ची की मौत जलने हुई थी। इसके बाद धर्म सिंह ने तीसरा विवाह किया। तीसरी पत्नी से उसे चार संतानें हुईं। इनमें दो बेटियां सोनिया और मोनिया के अलावा जगदीप और बलिंद्र उर्फ बिंदर बताए जा रहे हैं।