नशे के धंधे में संलिप्त दो दोषियों को अदालत ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोनों दोषियों को दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। दोनों दोषी साढ़े तीन साल पहले नशीली गोलियों के साथ पकड़े गए थे। जिला उप न्यायवादी मेनपाल राणा ने बताया कि 4 मार्च 2018 को सीआईए-2 की टीम रेलवे रोड पर गोल बैंक चौक के पास गश्त पर तैनात थी। इसी दौरान पुलिस टीम को दो लोग अपने हाथों में एक-एक लिफाफा लिए आते दिखाई दिए। शक होने पर पुलिस टीम ने दोनों को रोककर पूछताछ की। पूछताछ में उनकी पहचान संजय वासी शास्त्री नगर व नीरज वासी सेक्टर-7 के रूप में हुई थी। तलाशी लेने पर संजय के कब्जे से आठ डिब्बे जिसमें एलिप्रीन 0.5 की 3200 गोलियां तथा नीरज के कब्जे से इसी तरह की नौ डिब्बे में 3600 गोलियां बरामद हुई थी। पुलिस टीम ने मौके पर ड्रग इंस्पेक्टर संदीप हुड्डा को बुलाकर गोलियों की जांच कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि यह सब नशीली गोलियां हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना शहर थानेसर में नशीली वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके आरोपी संजय व नीरज को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों को अदालत के आदेश से कारागार भेज दिया था। पुलिस ने मामले का चालान अदालत में पेश किया था। मामले की नियमित सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश रजनीश कुमार शर्मा की अदालत में हुई। वीरवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने गवाहों व सबूतों के आधार पर आरोपी संजय व नीरज को दोषी करार देते हुए एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 के तहत 10 साल कैद व एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।