कुरुक्षेत्र। हरियाणा के झज्जर की मिट्टी को टेराकोटा के खिलौनों में तराशकर दिल्ली के शिल्पकार दयाचंद को वर्ष 2004 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। अब तक वे अपने टेराकोटा के छोटे-छोटे खिलौनों को ऑस्ट्रिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और ओमान आदि देशों में प्रदर्शित कर चुके हैं और अब अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कोरोनाकाल के बाद पहली बार पहुंचे है। कोरोनाकाल से पहले वे 10 साल तक यहां अपनी कला का प्रदर्शन करते रहे हैं।
दिल्ली के शिल्पकार दयाचंद ने स्टॉल नंबर 86 पर टेराकोटा के छोटे और बड़े खिलौने पर्यटकों के लिए रखे हैं। इन खिलौनों की कीमत महज 100 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक तय की गई है। उन्होंने बातचीत करते हुए कहा कि टेराकोटा की शिल्पकारी का काम उनके दादा-परदादा के समय से किया जा रहा है। इस टेराकोटा के खिलौनों को बनाने के लिए हरियाणा के झज्जर जिले से आठ से 10 हजार रुपये की कीमत से मिट्टी की एक ट्राली मंगवाते हैं और फिर इस मिट्टी से टेराकोटा के खिलौने तैयार करते हैं। इन खिलौनों का निर्माण करते-करते वर्ष 2004 में वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि इस बार घर और बगीचे की सजावट को चार चांद लगाने के उद्देश्य से विशेष खिलौने तैयार करके लाए है। इन खिलौनों की कीमत यहां आने वाले पर्यटकों के हिसाब से ही रखी गई है। शिल्पकार का कहना है कि भारत सरकार की तरफ से शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से सहयोग किया जा रहा है।