कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी की हवा लगातार दमघोटू होती जा रही है। भले ही धान कटाई का सीजन निपटने की ओर है, लेकिन फसल अवशेष जलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। जहां लगातार ये मामले सामने आ रहे हैं वहीं कैथल व आसपास के जिलों में बिगड़ी आबोहवा का असर भी यहां पड़ रहा है। यही कारण है कि धर्मनगरी का एक्यूआई 338 तक जा चुका है। बुधवार को एक्यूआई 297 तक रहा। हालांकि मंगलवार की अपेक्षा कुछ राहत मिली, लेकिन एक्यूआई का यह स्तर बेहद खराब माना जा रहा है। लोगाें का घरों से बाहर निकलना दूभर हो रहा है तो दमा, एलर्जी व अन्य मरीजों के लिए ज्यादा मुश्किल हो रही है। जिले के ये हालात तब है जब सरकार से लेकर जिला प्रशासन भी सख्ती बरते हुए है।
इस बार प्रदेश सरकार ने फसल अवशेष जलाने से रोकने को लेकर कड़ी सख्ती बरती हुई है। जिसके चलते अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। सेटेलाइट के जरिए भी निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद फसल अवशेषों में आग लगाए जाने के मामले जारी है। उधर, खराब वायु गुणवत्ता व बदलते मौसम के बीच बढ़ चुके 40 फीसदी तक मरीज बढ़ चुके हैं। जिनमें नेत्र रोगी और दमा रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा है। एलर्जी के मामले भी देखे जा रहे हैं।
308 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की मिल चुकी घटनाएं
जिले में फसल अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों को सेटेलाइट के साथ-साथ कृषि विभाग के अन्य अधिकारियों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। इन दोनों माध्यमों के जरिए जिले में अब तक 324 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की सूचना मिली है, इनमें से हरसेक सेटेलाइट से 121 और अन्य माध्यम से 203 सूचनाएं प्राप्त हुई है। इन 324 जगहों में 308 जगहों पर किसानों द्वारा फसल अवशेषों में आग लगाए जाने की सूचनाएं सही पाई गई हैं। ऐसे में 275 किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई और सात लाख 22 हजार 500 रुपये का जुर्माना भी किया जा चुका है। जिले में पिछले वर्ष धान के सीजन में फसल अवशेष जलाने की 302 घटनाएं सामने आईं थी। अब तक इस जिले में बासमती की 19,816 एकड़ और नॉन बासमती 2,47,348 एकड़ भूमि पर धान की फसल की कटाई का कार्य किया जा चुका है।
पिछले एक सप्ताह का रात आठ बजे यह रहा एक्यूआई
31 अक्तूबर-304
30 अक्तूबर-271
29 अक्तूबर-227
28 अक्तूबर-338
27 अक्तूबर-269
एक नवंबर-297
40 फीसदी से ज्यादा बढ़े रोगी : डॉ. अनेजा
कुवि स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. आशीष अनेजा का कहना है कि पिछले करीब 20 दिनों से ही बदलते मौसम व खराब हो रही वायु गुणवत्ता के चलते आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा जैसी बीमारियों के रोगी 40 फीसदी बढ़ चुके हैं। बच्चे भी इससे बड़े स्तर पर प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है।