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Kurukshetra News: रिश्वत मामले में फंसा क्लर्क, कैबिनेट मंत्री को सौंपी रिकाॅर्ड की डीवीडी

Thu, 06 Jul 2023 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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संवाद न्यूज एजेंसी
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शाहाबाद। नगरपालिका में एक क्लर्क द्वारा किराए की दुकान का मालिकाना हक देने की एवज में साढ़े तीन लाख रुपए रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने बुधवार को कुरुक्षेत्र में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में यह शिकायत दी है, जिसके बाद बैठक की अध्यक्षता कर रहे हरियाणा के शहरी एवं स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने इस मामले में सात दिन में कार्रवाई करने के निर्देश उपायुक्त को दिए।
शिकायत में गीता काॅलोनी शाहाबाद निवासी जगदीश लाल पुत्र संत राम ने बताया है वह और उनका पुत्र साहिल सुखीजा देवी मंदिर रोड पर नगरपालिका की दुकान पर पिछले करीब 23 साल से जूस का कार्य कर रहे है, जिसका किराया नगरपालिका को हर महीने वह समय पर देते है। साहिल ने बताया कि सरकार द्वारा किरायेदारों को मालिकाना हक देने की घोषणा के चलते उन्होंने भी सरकार के पोर्टल पर दुकान अपने नाम करवाने का आवेदन दिया, जिसके बाद फाइल नगरपालिका शाहाबाद में जमा हो गई।
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उसने और उसके पिता ने नगरपालिका के बहुत चक्कर लगाए, परंतु उनकी किसी ने नहीं सुनी। फिर उसे नगरपालिका में बुलाया गया। इस दौरान नगरपालिका में रेंट क्लर्क अजय कुमार ने दुकान उनके नाम करवाने की एवज में उक्त रकम मांगी। रिश्वत के पैसे देने से मना किया, तो अजय द्वारा कहा गया कि अब दुकान की उनके नाम सेल डीड कोई नहीं कर सकता क्योंकि नगरपालिका की सभी किराए वाली प्रॉपर्टी को वही देखता है।
साहिल ने बताया कि उसके पड़ोस के दुकानदारों ने नगर पालिका से दुकानों को अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली है और वह अजय कुमार के पास पिछले तीन महीने से चक्कर लगा रहा है, परंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जूस की दुकान चलाने वाला, रिश्वत का पैसा कहां से लाए


साहिल ने बताया कि अजय व्हाट्सएप कॉल कर दुकानदारों के साथ रिश्वत लेने की बातें करता है, जिसके बाद उसमें मेरे साथ भी व्हाट्सएप कॉलिंग कर ही बात करनी चाही। लेकिन उन्होंने मोबाइल का स्पीकर ऑन करके एक अन्य मोबाइल में अजय द्वारा की गई डिमांड की रिकॉर्डिंग कर ली।
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आरोपी क्लर्क अजय कुमार का कहना है कि जिस रिकॉर्डिंग का जिक्र किया जा रहा है, वह रिकॉर्डिंग झूठी है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता उसे 31 गज की रजिस्टरी करवाने की बात कर रहा था, लेकिन उन्होंने उससे 28 गज के अतिरिक्त 31 गज की रजिस्टरी के पैसे जमा करवाने की बात कही थी, न कि उन्होंने शिकायतकर्ता से कोई रिश्वत मांगी थी। अजय ने कहा कि रजिस्ट्री के लिए कलेक्टर रेट का पैसा ऑनलाइन अथवा पोर्टल पर जमा होना था, जिसे शिकायतकर्ता ने अभी तक जमा नहीं करवाया।
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