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Kurukshetra News: बिरला मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना

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थम नहीं रहा बिरला मंदिर की जमीन का मामला, लोग बोले- एक सप्ताह तक जारी रखा जाएगा धरना फिर आंदोलन को करेंगे तेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। बिरला मंदिर की जमीन का विवाद गहराता जा रहा है। बिरला मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने सोमवार को मंदिर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संस्थाओं के पदाधिकारियों ने बताया एक सप्ताह तक हर रोज सुबह नौ से 11 बजे तक धरना जारी रहेगा। इस दौरान प्रशासन ने जांच कर जमीन का यह सौदा रद्द नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
समिति के अध्यक्ष समाजसेवी अशोक शर्मा पहलवान के नेतृत्व में सुबह ही विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग बिरला मंदिर पहुंचने लगे। इसके बाद बैठक हुई, जिसमें सामाजिक संस्थाओं ने निर्णय लिया कि यदि प्रशासन की ओर से जमीन का सौदा रद्द नहीं किया गया तो वे सड़क जाम करने के साथ आंदोलन को और तेज करेंगे। अशोक पहलवान ने कहा कि जिला प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए ज्ञापन दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है। इसलिए वे धरना शुरू करने पर मजबूर हुए। यह धरना एक सप्ताह तक जारी रखा जाएगा धरने पर विशाल मोदगिल, रामपाल शर्मा, सुभाष चंद, सुखबीर चौधरी, सुरेंद्र सैनी, सुभाष बहल, राजेश बंसल, विवेक शर्मा, अश्वनी शर्मा, बाल किश्न, जय नारायण कौशिक, राजेश पंडित व नरेंद्र पाल सहित अन्य लोग भी शामिल रहे। उधर, बिरला मंदिर की जमीन को लेकर बढ़ते मामले के चलते पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। अधिकारी भी पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। फिलहाल धरना दे रहे लोगों तक प्रशासन की ओर से कोई नहीं पहुंचा।
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बिरला मंदिर की जमीन पर नहीं बनने दी जाएगी मार्केट
अशोक पहलवान ने कहा कि बिरला मंदिर से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यहां पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और तीज पर्व मनाने के लिए हजारों लोग जुटते हैं पर मंदिर परिसर की इस जमीन पर मुख्य सड़क के साथ मार्केट बनाए जाने की तैयारी की जा रही है जो गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए न केवल जमीन का सौदा होने के बाद रजिस्ट्री करवा ली गई बल्कि दुकानों का नक्शा भी बन चुका है। लेकिन ये प्रयास सफल नहीं होने दिए जाएंगे। उधर जिस संस्था पर आरोप लग रहे हैं, उसके संस्थापक महंत चिरंजीपुरी का कहना है कि जिस जमीन को लेकर यह मुद्दा उठाया जा रहा है, वह ली ही नहीं गई। बिरला मंदिर की जो जमीन ली गई वह अस्पताल बनाने के लिए ही ली गई है। दुकानें बनाने का कोई सवाल ही नहीं।
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