जब कुछ करने का जुनून होता है तो फिर उसके रास्ते में आंधी आए या तूफान कुछ मायने नहीं रखता। यूके में रह रहीं गुजरात के नवसारी की भारुलता पटेल कांबले ने इसे सार्थक कर दिखाया है। भारूलता ने न केवल कैंसर जैसी भयावह बीमारी को मात दी, बल्कि अपने दो छोटे बच्चों को लेकर निकल पड़ीं दुनिया के अंतिम छोर, उत्तरी ध्रुव की ओर। रास्ते में बर्फीला तूफान भी आया, लेकिन वह रुकी नहीं। उनके नाम कई वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं।
भारुलता ने सोलो कार ड्राइव किया और 32 देशों की यात्रा 57 दिन में पूरा किया। इस दौरान उन्होंने अकेले नौ पहाड़ी श्रृंखला, तीन बड़े मरुस्थल और दो महाद्वीप पार किए थे। वे सोमवार को कुरुक्षेत्र द्रोणाचार्य स्टेडियम में योगासन स्पोर्ट्स संघ की ओर से आयोजित योग प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में अपने सफर का रोमांच सबके साथ साझा कर रहीं थी।
उन्होंने कहा कि अब भारतीय पुरातन योग और चिकित्सा पद्धति विदेशों में भी देखने को मिल रही है। वह भारतीय मूल की एक ब्रिटिश नागरिक हैं। अभी हाल ही में वह मातृभूमि गुजरात के सूरत में अपने पति और दो बेटों के साथ रह रही हैं। उनके पति डॉ. सुबोध कांबले एक प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट यूरो-ओंको व रोबोटिक्स सर्जन हैं।
उन्होंने कहा कि वह पूरे भारत में 65 हजार किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। दोनों बेटे प्रियम (16) और आरुष (14) भी उनके साथ मिशन भारत पर हैं। उनका लक्ष्य दुनिया भर में भारतीय मूल के बच्चों को उनके ब्रिटिश जन्म के बच्चों के माध्यम से उनके मूल देश (मातृभूमि) भारत से जोड़ना है। उन्हें अविश्वसनीय भारत, विविध संस्कृतियों, विरासत, हजारों साल प्राचीन इतिहास, मातृभूमि की एकता और विविधता दिखाना है।