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Haryana News: आंदोलन की राह पर भारतीय किसान यूनियन, सड़कों पर उतरे किसान

Tue, 12 Sep 2023 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

15 सितंबर तक धान खरीद शुरू करने की चेतावनी दी है। विभिन्न मांगों के समर्थन में भाकियू ने जिला सचिवालय का मुख्य द्वार घेरा।
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कुरुक्षेत्र।लघु सचिवालय पर किसानों को संबोधित करते किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी।
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विस्तार
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मांगों के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन एक बार फिर आंदोलन की राह पर आ गई है। सोमवार को कुरुक्षेत्र जिले के किसान सड़कों पर उतरे तो जिला सचिवालय का मुख्य द्वार भी घेर लिया और कड़ा रोष जताया। किसानों ने ऐलान किया कि 15 सितंबर तक धान की खरीद शुरू नहीं की गई और अन्य मांगें जल्द पूरी नहीं की तो वे नेशनल हाईवे पर उतरने को मजबूर होंगे। करीब डेढ़ घंटा तक किसानों ने जिला सचिवालय भवन का मुख्य द्वार घेरा तो वहीं इस दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।

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सुबह करीब 11 बजे ही किसान पंचायत भवन के समक्ष जुटने लगे, जहां से पैदल मार्च करते हुए यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में जिला सचिवालय पहुंचे। यहां मुख्य द्वार पर धरना दिया तो जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान चढूनी ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन व सरकार को अवगत कराना चाहते हैं और जल्द ये मांगें पूरी नहीं हुई तो वे कड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 

वे नेशनल हाईवे पर भी पहुंच सकते हैं, जिसके लिए वे पुलिस की लाठियां खाने को भी तैयार हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, जिलाध्यक्ष कृष्ण कलाल माजरा, प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस, प्रिंस बड़ैच, जसबीर सिंह मामूमाजरा सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

हाईवे पर रास्ता नहीं दिया तो रोकेंगे निर्माण कार्य
गुरनाम चढूनी ने ऐलान किया कि इस्माईलाबाद से शाहाबाद को होते हुए नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस पर कहीं भी रास्ता नहीं दिया जा रहा, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस बारे में पहले भी प्रशासन से मांग की जा चुकी है और अगले तीन दिनों तक रास्ते नहीं छोड़े गए तो हाईवे का निर्माण कार्य बंद करवा दिया जाएगा।

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23 नवंबर को पिपली में होगी राष्ट्रीय पंचायत
गुरनाम सिंह चढूनी ने ऐलान किया कि 23 नवंबर को पिपली अनाजमंडी में यूनियन की राष्ट्रीय पंचायत होगी, जिसमें देशभर के किसान शामिल होंगे। यह महापंचायत किसानों की मांगों व यूनियन की अगली कार्रवाई की दिशा तय करेगी। इस दौरान अहम फैसले लिए जाएंगे।

ये रही मुख्य मांगें

  • गन्ने व पापुलर की खराब हुई फसलों पर भी मुआवजा दिया जाए। गन्ने का रेट 450 रुपये तय किया जाए।
  • धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाए, चावल पर निर्यात शुल्क वापस लिया जाए।
  • बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा तत्काल दिया जाए। मुआवजे को लेकर लगाई पांच एकड़ की सीमा को हटाया जाए। 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा तय किया जाए।
  • बाढ़ के चलते खराब हुए नलकूपों का भी दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। जो नलकूप खराब हो गए हैं, उन्हें दूसरी जगह बदले जाने की अनुमति दी जाए।
  • बाढ़ के चलते जिन किसानों के खेतों में रेत चढ़ गया है, उसे बेचने की अनुमति दी जाए।
  • एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाए, किसान कर्जमुक्त हो।
  • कर्ज के बदले पूरी जमीन रहन न की जाए। बरसाती पानी तालाब बनाकर जमा किया जाए।
  • वाहनों का पंजीकरण किलोमीटर आधार पर मानते हुए उनकी उम्र तय की जाए।
  • जुमला मुस्तरका मालिकाना हक किसानों को दिया जाए।
  • बेरोजगार युवकों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे विदेशों में पलायन करने से रुक सकें।
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