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कलियुग में भागवत ही मोक्ष का द्वार: आर्यमन कौशिक

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कुरुक्षेत्र। मां भगवती और पीतांबरा देवी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथावाचक आर्यमन कौशिक महाराज ने भीष्म पितामह और कुंती की मुक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कथा जीवन जीने की कला है। यह मृत्यु के उपरांत मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। इस काल में केवल भागवत कथा ही मोक्ष प्रदान कराने वाली है। कथावाचक ने बताया कि भीष्म पितामह पुराणों के बहुत बड़े ज्ञाता थे। जब वह महाभारत युद्ध के 10वें दिन घायल होकर गिर पड़े तो उस समय सूर्य दक्षिणायन था, इसलिए वे परलोक नहीं जाना चाहते थे। उन्हें पिता शांतनु से इच्छा-मृत्यु का वरदान मिला था, लिहाजा वह अर्जुन द्वारा बनाई गई बाणों की शय्या पर ही लेटे रहे। मंदिर के पुजारी पं. राजेश वत्स ने बताया कि कथा का आयोजन केडीएस पिपल केयर की ओर से किया जा रहा है। केयर के ट्रस्टी दीपक शर्मा और पवन गौतम ने बताया कि उनकी संस्था की ओर से अनेक सामाजिक कार्य किए जाते हैं, जिनमें गरीब कन्याओं का विवाह कराना, निशुल्क दवाएं वितरित करना, जरूरतमंदों को कपड़े वितरित करना और संकीर्तन के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार करना शामिल है।
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