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Kurukshetra News: एचएसजीपीसी विवाद के बीच फूटा ऑडियो बम

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कुरुक्षेत्र। पिछले पांच दिनों से चल रहे हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के विवाद के बीच शनिवार शाम को ऑडियो बम भी फूट पड़ा। इसके बाद पहले से आरोपों में घिरे महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा ने प्रधान को घेरने का प्रयास किया है।
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करीब तीन मिनट का ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें महासचिव धमीजा की ओर से सभी रास्ते साफ होने और कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद एसपी से बातचीत होने तथा मौसम साफ होने पर जींद सब ऑफिस में गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने की बात की जा रही है। इस दौरान प्रधान भी उन्हें ये स्वरूप ले जाने की बात कह रहे हैं। इस संबंध में महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा ने संपर्क करने पर बताया कि इससे उन पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को लेकर प्रधान की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की पोल खुल रही है। उन्होंने कहा कि उन पर जींद में गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने को लेकर बेअदबी तक के आरोप लगाए गए, जबकि ऑडियो में स्पष्ट है कि प्रधान खुद इजाजत दे रहे हैं। ऐसे में उन पर ये आरोप कहां साबित हो सकते हैं। ऑडियो में प्रधान उन पर पूरा भरोसा तक जता रहे हैं। अब यह ऑडियो आने के बाद प्रधान का मुंह बंद हो गया है। उन्होंने कहा कि अब प्रधान को संगत को जवाब देना होगा।


गुमराह कर स्वरूप ले जाने की थी तैयारी : हरप्रीत
कमेटी प्रधान महंत कर्मजीत सिंह के प्रतिनिधि हरप्रीत सिंह का कहना है कि जो ऑडियो वायरल की गई है। यह 13 अगस्त सुबह की है। यह बातचीत होने के बाद जब पांच सदस्यीय कमेटी से जींद में पांच स्वरूप ले जाने को लेकर कोई आवेदन मिलने व अन्य प्रक्रिया पूरी होने की बात की तो पता चला कि ऐसा कुछ भी नहीं था। प्रधान को गुमराह कर ये स्वरूप ले जाने की तैयारी थी, लेकिन सच्चाई पता चलते ही इन्हें रोक दिया गया। यहीं नहीं गुरविंद्र सिंह धमीजा ने इससे करीब एक सप्ताह पहले कुरुक्षेत्र कार्यालय में प्रधान के साथ गाली-गलौज तक की थी। इन दोनों बातों को लेकर श्री पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा में 14 अगस्त को हुई बैठक में जवाब लिया जाना था, जिससे बचने के लिए उन्होंने पूरा ड्रामा खड़ा कर दिया। इससे पहले भी गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर उनसे स्प्ष्टीकरण मांगा गया था, जो नहीं दिया।
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बिना प्रक्रिया पूरी हुए, नहीं ले जाए जा सकते स्वरूप
हरप्रीत सिंह ने बताया कि गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप स्थापित करने से पहले संबंधित गुरुघर व संस्थान की ओर से आवदेन देना होता है। इसके बाद पांच सदस्यीय कमेटी पूरी प्रक्रिया व हालात देखती है, जिसके बाद ही मर्यादा के अनुसार स्वरूप स्थापित किया जा सकता है। इसके विपरीत जींद में स्वरूप ले जाने को लेकर कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। स्वरूप ले जाने को लेकर पुलिस की भी जरूरत नहीं होती।
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