फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ने बाजीगर कॉलोनी को 12 अगस्त तक खाली करने का दिया नोटिस, हड़कंप

विज्ञापन
विज्ञापन
रेलवे की ओर से 12 अगस्त को रेलवे के साथ लगने वाली बाजीगर कॉलोनी को खाली कराने के नोटिस के बाद कॉलोनी वासियों में हड़कंप मचा हुआ हैै। करीब 700 से ज्यादा परिवार इस कॉलोनी में रहते हैं, जोकि अब दर-दर जाकर मदद की गुहार लगा रहे हैं।
विज्ञापन

करीब चार महीने पहले भी रेलवे ने इस कॉलोनी से कब्जे हटाने की कार्रवाई में लाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने रेलवे को पत्र लिखकर किसी भी तरह की कार्रवाई न करने के निर्देश जारी कर दिए थे। अब दोबारा से कार्रवाई का नोटिस मिलने से इस कॉलोनी के लोग भागदौड़ कर रहे हैं। दोबारा से नोटिस मिलते ही कॉलोनी के लोगों ने सोमवार को विश्रामगृह में विधायक रामकरण काला से मुलाकात कर उनको उजड़ने से बचाने की गुहार लगाई। इस पर विधायक रामकरण काला ने उपायुक्त व जिला पुलिस अधीक्षक को कॉलोनी न उजाड़ने का आग्रह किया। उन्होंने इस मामले को विधानसभा के सत्र में भी उठाया। विधायक रामकरण काला ने कहा कि अगर गरीबों के घरों को बचाने के लिए जरूरत पड़ी तो वह वह खुद इन परिवारों के साथ धरने-प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। चार महीने पहले भी रेलवे को कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब दोबारा रेलवे ने नोटिस भेजा है। यह सरासर गलत है। इस मुद्दे को लेकर वह मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से बात करेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि कॉलोनियों में रह रहे परिवारों से उनकी वाजिब कीमत किस्तों में ली जाए और यह जमीन उन परिवारों के नाम अलॉट की जाए।
कहा कि यह लोग आजादी के बाद से यहां रह रहे हैं। ऐसे में अचानक उन लोगों को बेघर करना न्यायोचित नहीं है। इसलिए हरियाणा सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करके इन गरीबों को बेघर होने से बचाए। इन गरीबों ने पंछियों की तरह तिनका-तिनका जोड़ कर अपने आशियाने बनाए हैं। इसलिए इन पर रेलवे रूपी ग्रहण नहीं लगने दिया जाएगा। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, अमरजीत सिंह, ज्ञान सिंह, सुखदेव, चन्नी राम, शकुंतला देवी, सोमादेवी, कमला देवी, राजकुमार, मेघराज, अंग्रेज सिंह, पाली राम, गुरमुख सिंह व कश्मीर सिंह सहित कॉलोनीवासी मौजूद रहे।
विज्ञापन

विधायक रामकरण काला ने विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सरकार से मामले में हस्तक्षेप करके कॉलोनी बचाने की मांग रखी। वहीं कॉलोनी के लोगों का कहना है कि आजादी के बाद से वह लोग अपने परिवार के साथ यहां आकर यहां बसे गए थे। अब रेलवे उनको बेघर करने पर तुला हुआ है। मांग है कि सरकार उनको बेघर होने से बचाए। यहां करीब 700 परिवार रहते हैं। उन्होंने बड़ी मेहनत से अपने परिवार के लिए आशियाना बनाया है।
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि एक तरफ तो सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, मगर दूसरी ओर उनको उजाड़ा जा रहा है। उनकी दो-तीन पीढ़ियों ने इस स्थान पर गुजर-बसर किया है। इस जगह से उनकी कई यादें और भावनाएं जुड़ी है। मांग है कि उनकी कॉलोनी को उजाड़ा न जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें