कुरुक्षेत्र। धान की कटाई के सीजन में जिला प्रशासन किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के नुकसान से सचेत करना है। प्रशासन किसानों से पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील कर रहा है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि पराली जलाने से वातावरण में धुआं और हानिकारक प्रदूषक फैलते हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब होती है। आग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है, जो उर्वरता बनाए रखने में सहायक हैं। लगातार पराली जलाने से मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ता है। इससे कृषि की दीर्घकालीन उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका रहती है।