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जिलेभर में 9800 एमटी खाद की कमी, आते ही बिकी खाद

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जिलेभर में डीएपी खाद की किल्लत के चलते किसान परेशान हो रहे है। हालांकि प्रशासन डीएपी के वितरण के लिए व्यवस्था का दावा कर रहा है। वहीं डीएपी की कालाबाजारी को रोकने के लिए कई टीमों भी बनाई गई हैं। जिलेभर में खाद की 20 हजार मीट्रिक टन खपत हैं जबकि 30 अक्तूबर तक केवल 10200 मीट्रिक टन ही उपलब्ध हुई है। जिले में ही 9800 मीट्रिक टन खाद कम है। किसान सुबह ही लाइन में आकर खड़े हो जाते है और शाम तक मात्र 1-2 बैग ही उनको मिलता है। वहीं भाकियू का आरोप है कि रात के अंधेरे में 20-30 बैग अपने चहेतों को बांटी जा रही है। भाकियू प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बताया कि शुक्रवार को पिहोवा में 3100 बैग डीएपी खाद के आए थे, जो हाथों हाथ ही बिक गई। शनिवार को पिहोवा में खाद की सप्लाई नहीं हुई। कहा कि कृषि विभाग डीएपी की जगह एनपीके इस्तेमाल करने का सुझाव दे रहा है, मगर इसके इस्तेमाल से गेहूं में खर्च प्रति एकड़ 800-1000 व आलू की बिजाई में खर्च 3500 -4000 का खर्च बढ़ जाएगा, क्योंकि डीएपी में फास्फोरस की मात्रा 46% व नाइट्रोजन की मात्रा 18% होती है जबकि एनपीके में फास्फोरस मात्र 32% व नाइट्रोजन मात्र 12% होती है। इसके चलते किसानों को एनपीके के एक की जगह डेढ़ बैग डालना पड़ेगा।
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