कुरुक्षेत्र। इनेलो नेता अभय चौटाला कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से फिर लोकसभा चुनावी जंग के मैदान में उतरे हैं। यह उनका इस क्षेत्र में दूसरा मौका होगा। इससे पहले वर्ष 2004 में भी वे मैदान में आए थे और उस दौरान कांग्रेस प्रत्याशी नवीन जिंदल उन्हें करीब एक लाख 60 हजार मतों से हराकर सांसद बने थे। वहीं 2019 में अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला ने भी यहीं से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और उन्हें करीब 60 हजार 574 वोट मिले थे।
प्रत्याशी के तौर पर अभय चौटाला के नाम की घोषणा
शनिवार को जाट धर्मशाला में इनेलो के राष्ट्रीय उप प्रधान एवं चुनाव समिति के अध्यक्ष प्रकाश भारती ने प्रेस वार्ता में की। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के चलते पार्टी की ओर से चुनाव समिति बनाई गई थी, जिसमें पार्टी राष्ट्रीय संगठन सचिव श्याम सिंह राणा, इनेलो अनुशासन समिति के चेयरमैन शेर सिंह बड़शामी, जसबीर ढिल्लो सदस्य थे। कमेटी ने हरियाणा की 10 की 10 लोकसभा सीटों पर जाकर लोगों की राय जानी व जनता से रायशुमारी की। उन्होंने कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से अभय चौटाला के प्रत्याशी होने की घोषणा करते हुए कहा कि अन्य क्षेत्रों के प्रत्याशी भी जल्द घोषित कर दिए जाएंगे। इसके लिए सभी क्षेत्रों से संबंधित नामों का पैनल पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला को सौंप दिए गए हैं और सभी पर विचार विमर्श हो चुका है। भारती ने कहा कि प्रदेश में इनेलो पांच बार सत्ता में रह चुकी है। इस पार्टी का कार्यकर्ता बेहद मजबूत है और पार्टी लोगों के दिलों में बसी हुई है। मुख्यमंत्री के तौर पर पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने ही जनता के बीच जाना शुरू किया था, जिसके चलते पार्टी का ग्राफ भी बढ़ा था। इस दौरान इनेलो राष्ट्रीय संगठन सचिव श्याम सिंह राणा, इनेलो अनुशासन समिति के चेयरमैन शेर सिंह बड़शामी, जिला प्रधान बूटा सिंह लुखी, जिला प्रभारी रामकुमार ऐबला सहित कई नेता मौजूद रहे।
ताकत के साथ चुनाव लड़ने को संगठन तैयार
प्रकाश भारती ने कहा कि पूरे प्रदेश में चुनाव के लिए पार्टी संगठन पूरी तरह से तैयार है और पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा जाएगा। अन्य सीटों के लिए भी जल्द फैसला ले लिया जाएगा जबकि अभय चौटाला भी जल्द अपना चुनाव प्रचार शुरू कर देंगे। भारती ने कहा कि देश में किसानों के लिए सबसे बड़ी लड़ाई अभय सिंह चौटाला ने ही लड़ी है। प्रदेश में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी चरम सीमा पर है और इनके साथ सरकार की अन्य कारगुजारी ही मुख्य चुनावी मुद्दे रहेंगे।