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Kurukshetra News: 21 किलो भस्म से उतारी जाएगी संगमेश्वर महादेव की आरती, भस्म से शृंगार

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कुरुक्षेत्र/पिहोवा। महाशिवरात्रि पर्व पर आज 21 किलो भस्म से संगमेश्वर महादेव अरुणाय की महाआरती की जाएगी। महाशिवरात्रि पर लगने वाले मेले की सभी तैयारी मंदिर प्रबंधन की ओर से पूरी कर ली गई है। इस बार महाशिवरात्रि पर अद्भुत त्रिकोणीय योग बन रहा है। कई साल के बाद त्रयोदशी, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि का संयोग बना है। इस बार महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में शिव योग और सर्वाथ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। इस योग में भगवान शिव की आराधना करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। आने वाले कई साल तक महाशिवरात्रि पर यह अद्भुत योग बना रहेगा। इस योग में पूजा अर्चना करने से हर प्रकार के पाप व दोष से मुक्ति मिलती है। वहीं सर्वाथ सिद्ध योग में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोवांछित फल मिलेंगे। हर बाधा और कष्ट से दूर होगा।
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श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर 21 किलो भस्म से संगमेश्वर महादेव की आरती उतारी जाएगी। इस दौरान मुख्य मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश निषेध रहेगा। आरती के बाद महादेव का भस्म से शृंगार किया जाएगा। इस भस्म को गाय के गोबर के उपलों और आम के पेड़ की लकड़ी से तैयार किया जाता है। इस विधि में काफी समय लगता है।



शनिवार को भी होगा जलाभिषेक : गौतम
संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय के पुरोहित पंडित शंभूदत्त गौतम ने बताया कि आज महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा। यह योग रात 9.57 बजे तक रहेगा। इसके बाद चर्तुदशी का आरंभ होगा। चर्तुदशी पर भी भगवान शिव पर श्रद्धालु अभिषेक कर सकेंगे। यह योग शनिवार शाम 6.57 बजे तक रहेगा।
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मंदिर में चमत्कार का प्रत्यक्ष प्रमाण
मंदिर में चमत्कार का प्रमाण आज भी दो बातें में प्रत्यक्ष रूप से मिलता है। पहला प्रमाण यह है कि इस मंदिर की सीमा में चारपाई नहीं बिछाई जाती है। दूसरा यह कि मंदिर की सीमा में दूध बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जाता है। यदि कोई हठपूर्वक प्रयास करता है तो दही में कीड़े में पड़ जाते हैं। वामन पुराण के अनुसार प्रह्लाद व पांडव भी इस तीर्थयात्रा पर यहां आ चुके हैं।



दीमक के बीच से मिला था शिवलिंग, वहीं बना मंदिर
यहां पुराने समय में महात्मा गणेश गिरि अपने शिष्यों सहित रहते थे। एक दिन वह झाड़ियों की तरफ घूम रहे थे। वहां उन्हें घास के बीच दीमक की बांबी का ढेर दिखाई दिया। उन्होंने अपने चिमटे से इसे कुरेदा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। बांबी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और दिव्य शिवलिंग दिखाई दिया। उन्होंने इस शिवलिंग को यहां से उखाड़ कर अन्य स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया, मगर खोदाई में शिवलिंग का कोई छोर नहीं बरामद नहीं हुआ। बाद में भगवान शिव की प्रेरणा से इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया।
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