कुरुक्षेत्र।कमोदा गांव में स्थित ऐतिहासिक पौराणिक काम्यकेश्वर तीर्थ।विज्ञप्ति
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी की 48 कोस की पावन भूमि में स्थित काम्यकेश्वर तीर्थ एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने जा रहा है।
ज्येष्ठ माह की रविवारीय शुक्ल सप्तमी के अवसर पर 21 जून को यहां पारंपरिक मेले का आयोजन होगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तीर्थ में स्नान और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित काम्यकेश्वर तीर्थ का संबंध महाभारत काल से भी पहले का माना जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने इसी क्षेत्र को अपनी शरणस्थली बनाया था। वामन पुराण में भी काम्यक वन और काम्यकेश्वर तीर्थ का उल्लेख मिलता है। पुराणों के अनुसार महर्षि पुलस्त्य और महर्षि लोमहर्षण ने इस तीर्थ की महिमा का वर्णन करते हुए बताया है कि सरस्वती नदी के तट पर स्थित इस पवित्र स्थल पर स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवारीय शुक्ल सप्तमी के दिन इस तीर्थ में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन सूर्य भगवान पूषा स्वरूप में यहां विद्यमान रहते हैं। इसी कारण यह तिथि श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।
कुरुक्षेत्र।कमोदा गांव में स्थित ऐतिहासिक पौराणिक काम्यकेश्वर तीर्थ।विज्ञप्ति- फोटो : Archive