कुरुक्षेत्र। आशा वर्करों की हड़ताल लगातार जारी है, जिसका असर भी दिखाई पड़ने लगा है। जहां हर स्कूल में चलाया जाने वाला एलबेंडाजोल अभियान टालना पड़ा तो वहीं गर्भवती महिलाएं भी अब खुद को असहाय सी महसूस करने लगी है। आशा वर्करों ने दावा किया है कि उनके पास हर रोज करीब 700 कॉल आ रही है, जिनमें अधिकतर गर्भवती महिलाओं की होती है। यहीं नहीं उनकी देखभाल अब खुद या फिर परिवार पर निर्भर हो गई है। उधर बुधवार को भी आशा वर्कर की हड़ताल जारी रही, जिस दौरान जिला सचिवालय परिसर में धरना दिया तो जमकर नारेबाजी भी की।
उल्लेखनीय है कि जिके भर में 752 आशा वर्कर हैं, जिन पर विशेषतौर पर गर्भवती महिलाओं की संभाल की जिम्मेदारी होती है। सात से आठ विजिट उन्हें करनी पड़ती है तो वहीं उनकी सही और समयानुसार डिलिवरी हो, यह भी सुनिश्चित करवाना होता है। बच्चा पैदा होने के बाद भी उसके खान-पान से लेकर अन्य हालात पर भी निगरानी रखनी होती है। हर आशा वर्कर पर 15 से 20 गर्भवती महिलाएं अक्सर होती है, जिनकी निगरानी का जिम्मा उन पर होता। उधर गत 10 अगस्त को ही सरकार द्वारा पहले से ही तय एलबेंडाजोल अभियान को स्थगित करना पड़ा, जिसमें सभी स्कूली बच्चों को यह दावा दी जानी थी। अब यह अभियान कब चलाया जाएगा, फिलहाल तय नहीं हो पाया है।
बच्चों का टीकाकरण तक नहीं हो पा रहा : पिंकी
आशा वर्कर यूनियन प्रधान पिंकी का कहना है कि उनकी हड़ताल के चलते बच्चों के टीकाकरण तय समय पर नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही जन्म-मृत्यु रिकार्ड भी दर्ज नहीं हो पा रहा है। ऐसे में माता-पिता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर रोज जिले भर से आशा वर्करों के पास 700 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की कॉल आती है, ताकि उनकी निगरानी हो सके, लेकिन वे हड़ताल के चलते उन तक नहीं जा पा रही हैं। यहीं नहीं आशा वर्करों से जुड़े अन्य कार्य भी पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।
आज निकालेंगी रोष यात्रा
हड़ताल पर उतरी आशा वर्कर वीरवार सुबह 10:30 बजे उपायुक्त कार्यालय पर इकट्ठी होकर रोष जताएंगी। इसके बाद सांसद नायब सिंह सैनी के आवास तक रोष यात्रा निकाला जाएगा, जहां उन्हें मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
ये है मांगें
जिला उपप्रधान मंनजीत एंव जिला सचिव कुशमलता का कहना है कि उनकी मांगों में न्यूनतम वेतन 26 हज़ार लागू करना। सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना। ईएसआई व ईपीएफ का लाभ देना। रिटायरमेंट की उम्र 65 साल किया जाना, ऑन लाइन काम न करवाना शामिल है। इन मांगों को लेकर वे आठ अगस्त से हड़ताल पर हैं और जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा।
एएनएम को सौंपा जिम्मा : सीएमओ
सीएमओ डॉ सुखबीर सैनी का कहना है कि आशा वर्कर की हड़ताल के चलते गर्भवती महिलाओं की निगरानी व उनकी डिलीवरी तक का जिम्मा अब एएनएम को सौंपा हुआ है जबकि मेल वर्कर की भी सहायता ली जा रही है। जरूरत के अनुसार आंगनवाड़ी वर्कर का भी सहयोग मिल रहा है। फिलहाल जिला में आशा वर्कर की हड़ताल के चलते नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना काम मानदेय नहीं दिया जाएगा।