बल्गारिया एवं यूरोप में हिंदी भाषा एवं संस्कृति की अपार संभावनाएं: प्रो. मोना
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। बल्गारिया एवं यूरोपीय देशों में हिंदी भाषा एवं संस्कृति के साथ योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। भारतीय संस्कृति, शिक्षक एवं हिंदी शिक्षक के रूप में भी यूरोप के अनेक देशों में भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए क्षेत्र खुल रहे हैं। सोफिया विश्वविद्यालय बल्गारिया की इंडोलॉजी की प्रो. मोना कौशिक ने केयू के डीवाईसीए विभाग द्वारा मारकंडा नेशनल कॉलेज शाहाबाद में आयोजित साहित्यिक कार्यशाला में दी। वे बल्गारिया राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में भारतीय संस्कृति की अनूठी पहचान है। भारतीय संस्कृति के विविध स्वरूपों में आईसीसीआर तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से रोजगार के नए क्षेत्र खुल रहे हैं। प्रो. मोना ने बल्गारिया एवं भारतीय संस्कृति में परस्पर संबंधों के जुड़ाव को उजागार करते हुए अपने अनुभव विद्यार्थियों से सांझा किए। बोली कि आने वाले दिनों में यूरोप में भारतीय विशेषज्ञों को विदेशों में और अधिक रोजगार एवं पहचान मिलेगी। विशिष्ट अतिथि आईआईएचएस से डा. महासिंह पूनिया ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है ताकि हरियाणा की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिल सके। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डा. अशोक चौधरी, एमएलएन कॉलेज रादौर के प्राचार्य सुनील गुप्ता, आर्य कॉलेज पानीपत के डा. रामनिवास, डा. जगमिंद्र मलिक, डा. शालिनी शर्मा, डा. देवराज तथा डा. कुलवंत चावला सहित अन्य मौजूद रहे।