संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पिहोवा के सब डिविजनल अस्पताल (एसडीएच) की नई बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग के गले की फांस बन चुकी है। इस 50 बेड के अस्पताल पर 16 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद स्वास्थ्य विभाग पुरानी बिल्डिंग में अस्पताल (सीएचसी) चल रहा है। नई बिल्डिंग जहां नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थ केयर (एनएबीएच) के मानकों पर खरा नहीं उतर रही है वहीं पुराने अस्पताल की बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करके पत्र सीएमओ और पीडब्ल्यूडी को भेजा जा चुका है।
अस्पताल की 40 साल से ज्यादा पुरानी बिल्डिंग में ओपीडी चल रही है। साथ ही दवाखाना और लैब को भी चलाया जा रहा है। बिल्डिंग कई जगहों से जर्जर हो चुकी है। छत से कई बार प्लस्तर टूट कर गिर चुका है। वहीं मरीजों के बैठने के लिए बनाई सीमेंट की स्लैब भी टूट चुकी है, मगर नई बिल्डिंग बनने के बाद भी उसे शुरू नहीं किया जा सका।
गत शुक्रवार को विभाग के डिप्टी सीएमओ बिल्डिंग डॉ. सुरेंद्र खामरा और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने नए बिल्डिंग का जायजा लिया। इसमें डॉ. सुरेंद्र खामरा ने पीडब्ल्यूडी से पहले दो फ्लोर शुरू करके देने की मांग रखी। हालांकि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने एनएबीएच की गाइडलाइन के तहत सीमलेस फ्लोर अन्य मांग के लिए अतिरिक्त बजट की मांग रखी। वहीं नई भी देखरेख के अभाव में खस्ता होने लगी है।
पीडब्ल्यूडी ने अस्पताल के एक कमरे में सीमलेस फ्लोर बनाने का प्रयास किया। ठेकेदार ने फ्लोर तो बना दिया, मगर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे पास नहीं किया, क्योंकि उसकी गुणवत्ता ज्यादा खास नहीं थी। अब पीडब्ल्यूडी के सामने उच्च गुणवत्ता का फ्लोर बनाने की चुनौती भी होगी।
पुराने अस्पताल में चल रही शहरी पीएचसी
सीएमओ ललित कल्सन ने बताया कि पुराने अस्पताल की इमरजेंसी बिल्डिंग में शहरी पीएचसी चलाई जा रही है। इसके लिए स्टाफ को नियुक्त कर दिया गया है, जबकि ओपीडी और लैब वाली बिल्डिंग को मरम्मत करके काम चलाया जा रहा है। इसको कंडम घोषित करने के लिए सीएमओ और पीडब्ल्यूडी को पत्र भेज दिया गया है।
दो जगह नहीं चल सकेगा अस्पताल
डिप्टी सीएमओ बिल्डिंग डॉ. सुरेंद्र खामरा ने बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। उन्होंने अस्पताल को चलाने के लिए जिन मानको की जरूरत उससे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को अवगत का दिया है। हालांकि अस्पताल चलाने के लिए ऑपरेशन थियेटर और डिलीवरी रूम सहित पहली दो मंजिल पर जरूरत के अनुसार काम करके सौंपने का सुझाव भी दिया गया है।