नाटक सखाराम बाइंडर में दिखी रिश्तों की सच्चाई
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में हरियाणा स्वर्ण जयंती महोत्सव के दौरान प्रत्येक शुक्रवार आयोजित की जा रही सांस्कृतिक संध्या में बहुचर्चित नाटक सखाराम बाइंडर का मंचन किया गया। विजय तेंदुलकर के लिखे तथा सरोजनी वर्मा द्वारा अनुवादित नाटक सखाराम बाइंडर का निर्देशन यमुनानगर की महिला रंगकर्मी कनिष्ठा पाठक द्वारा किया गया। कार्यक्रम नियमानुसार राष्ट्रीय गीत से प्रारंभ किया गया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया। नाटक में पति-पत्नी के रिश्ते की कड़वी सच्चाई को बयान करते हुए आदमी की वासना और घुट-घुटकर जीती औरत की जिंदगी को दिखाया गया। सखाराम बांइडर समाज के हर वर्ग पर प्रहार करता है। जहां पुरुष के लिए वासना ही सब कुछ है वहीं औरत के लिए अपनी भावनाओं को दबाकर घुटते हुए जीना ही जिंदगी बन जाता है। सखाराम, वासना के कारण एक औरत लक्ष्मी को अपने घर ले आता है। लक्ष्मी बहुत भोली-भाली है और उसके पति ने उसको छोड़ दिया है, जिस कारण सखाराम अपनी वासना की भूख को शांत करने के लिए लक्ष्मी को प्रताड़ित करता रहता है। एक दिन लक्ष्मी को सखाराम अपने घर से निकाल देता है और दूसरी औरत चम्पा को घर ले आता है। लेकिन चम्पा बहुत तेज-तर्रार औरत है। जो सखाराम की मार सहन नहीं करती उल्टा उसी को पीटना शुरु कर देती है। अपनी हवस की भूख और मर्दानगी को जाहिर करने के कारण सखाराम चम्पा का खून कर देता है। इस प्रकार आदमी और औरत के रिश्ते पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया नाटक सखाराम बाइंडर ने। दो घण्टे से भी ज्यादा अवधि के नाटक ने शुरु से ही दर्शकों को बांधे रखा। प्रत्येक दृश्य तथा संवाद पर दर्शक अपनी तालियों के माध्यम से कलाकारों का हौंसला बढ़ाते नजर आए। नाटक में रहीश ने सखाराम के पात्र को जीवंत किया तो वहीं अंकिता गुप्ता ने डरी-सहमी सी औरत लक्ष्मी का किरदार निभाया। चम्पा के रुप में कुरुक्षेत्र की कलाकार पारुल कौशिक ने अपने संवाद तथा अभिनय के दम पर नारी के दूसरे पक्ष को बहुत खूबी से उजागर किया।