मॉरीशस में होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन में मातृभूमि सेवा मिशन का प्रतिनिधि मंडल होगा शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र । हिंदी भाषा का विकास भारत में सदियों पहले हो चुका है और यह भाषा भारत के जन मन में काफी पैठ बना चुकी है। भारत के लोग बचपन से ही इसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हिंदी इतनी सरल और सहज भाषा है कि इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान है। यह विचार मॉरीशस गणराज्य के राजदूत डॉ. जगदीश गोवर्धन ने मॉरीशस में होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भ में मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ श्रीप्रकाश मिश्र द्वारा की गई एक शिष्टाचार मुलाकात के दौरान व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत में 7 से 8 प्रतिशत लोग अंग्रेजी नहीं जानते हैं। अगर उनसे संवाद करना हो तो हिंदी जानना ही पड़ता है। हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसमें अपनी भावनाओं को अच्छी तरह व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने मॉरीशस में 18 से 2 अगस्त तक होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा एक प्रतिनिधि मंडल भेजने की अपील की। डॉ गोवर्धन ने कहा कि जहां भी भारतीय मूल के लोग पूरे विश्व में फैले हुए हैं, वहां उनके लिए हिंदी भारतीयता का परिचायक है। विश्व में हिंदी प्रत्येक भारतीय के लिए आत्म सम्मान है। मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ श्रीप्रकाश मिश्र ने बताया कि मॉरीशस में होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन में मिशन का एक प्रतिनिधि मंडल शामिल होना देश के लिए गौरव का विषय है