चिंतन शिविर प्रदेश की जनता की उन्नति व विकास के लिए : बेदी
शाहाबाद
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा भाजपा के चिंतन व मंथन शिविर की निरंतर की जा रही आलोचना पर पलटवार व कडा प्रहार करते हुए राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि ऐसे शिविर हुड्डा के शासनकाल में भी लगते थे, लेकिन अंतर इतना है कि तब इन चिंतन शिविरों में भाई भतीजा वाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद, किसानों की बेशकीमती जमीनें छीनकर बिल्डरों को देने, क्षेत्र विशेष के लिए रोजगार में हेराफेरी करने, खनन माफियाओं को संरक्षण देने के लिए चिंतन होते थे। हरियाणा के विकास के लिए इन्होंने कभी चिंतन नहीं किया। राज्यमंत्री अपने निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। राज्य मंत्री ने कहा कि हुड्डा शासन में चिंतन हुआ तो केवल हरियाणा राज्य के दलित नेतृत्व को खुड्डा लाईन लगाने के लिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा,पूर्व सांसद ईश्वर सिंह, पूर्व विधायक राजपाल भूखडी साढौरा, नरेश सेलवाल उकलाना की राजनीति समाप्त करने के लिए, स्वयं प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को अपमानित व प्रताड़ित करने के लिए चिंतन करते हैं। उन्होने कहा कि प्रो. वीरेंद्र , मुख्य सलाहकार से हरियाणा को अग्रि भेंट करने बारे चिंतन करने का कार्य किया। इसलिए हुड्डा को गैर जिम्मेदाराना ब्यान देने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि सीएम मनोहर लाल परिवारवाद व भाई भतीजावाद से परे हैं। क्षेत्रवाद को उन्होने समाप्त किया है। उनकी सोच केवल राज्य के विकास के लिए है। इसलिए हुड्डा को चिंतन शिविर से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं। उन्होने कहा कि लगाया जा रहा चिंतन शिविर राज्य के अढाई करोड लोगों की उन्नति व विकास के लिए किया जा रहा है जिसमें 3 वर्ष के सरकार के कार्यों की समीक्षा होगी तथा आगामी दो वर्ष के लिए जनता के हितों के लिए रोड मैप तैयार हो जाएगा। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री निरंतर देश व प्रदेश के विकास को समर्पित हैं। वास्तव में कांग्रेस की नैया डूब रही है, कांग्रेस का वजूद समाप्ति की ओर है और भाजपा मिशन 2024 मानकर चल रही है। तब तक तो हुड्डा सत्ता में लौटने के दिव्य स्वप्र लेने छोड दें। आज भाजपा के सामने कोई राजनीतिक चुनौती नहीं और केंद्र में नमो व प्रदेश में मनो और सर्वत्र नमो नमो, मनो मनो है। इस अवसर पर कर्णराज सिंह तूर, मुलख राज गुंबर, अरूण कंसल, बलदेव राज चावला, रणजीत सिंह राव, रिंकू बैरागी, विष्णु भगवान गुप्ता, जोगिंद्र रत्ता, देव राज चराया भी मौजूद थे।