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चार गांवों में 130 एकड धान की फसल बरसात के पानी में डूबी

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लाडवा। खंड के कई गांवों में बरसात ने किसानों के होश उड़ा दिए हैं। पिछले चार दिनों से लगातार बरसात होने के कारण गांव मेहरा, जोगीमाजरा, शहजादपुर और दुगारी में करीब 130 एकड़ जमीन में लगी धान की फसल पानी में डूबने से खराब हो गई है। इसमें से गांव मेहरा में ही करीब 40 एकड़ जमीन में लगाई गई फसल पानी में डूब गई है। बरसात के पानी में डूबी अधिकतर जमीन में किसानों ने धान की रोपाई कर दी थी। किसान अब बरसात से खराब हुई फसल का मुआवजा मांग रहे हैं। गांव मेहरा के सरपंच छत्रपाल मेहरा ने बताया कि उनके गांव की पानी में डूबी जमीन ग्राम पंचायत की जमीन है जिसे गांव के ही किसानों को पट्टे पर दिया गया था। पट्टे पर जमीन लेकर किसानों ने इस जमीन में धान की रोपाई कर दी थी लेकिन सोमवार से लगातार बरसात से धान की पनीरी पानी में डूब गई है और खराब हो गई है। इस जमीन को पट्टे पर लेने वाले किसानों नरेश कुमार, उदय सिंह, हाकम सिंह, कदम सिंह सलिंद्र सिंह व सुरेश आदी ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत की इस जमीन को 25 से 37 हजार रुपये तक प्रति एकड़ की भारी रकम खर्च कर पट्टे पर लिया था और धान की रोपाई की थी जिस पर प्रति एकड़ हजारों रुपये की लागत आई थी। पट्टेदार किसानों ने बताया कि बरसात ने उनकी सारी मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया है। किसानों का कहना है कि पिछले गांवों से बहकर बरसाती पानी उनके खेतों में आ गया और खेत चार फुट तक पानी में डूबे हुए हैं। किसानों का कहना है कि यदि अब कम से कम एक-डेढ़ सप्ताह बरसात न हुई तो ही नये सिरे से खेत तैयार करके धान की रोपाई के बारे में सोचा जा सकेगा। किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के लिए अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता धान की तैयार पनीरी का न होना है। धान की नई नर्सरी तैयार करने में 25 दिन का समय लगता है जिससे धान की फसल का समय निकल जाएगा। बरसात से प्रभावित किसानों ने सरकार में मांग की है कि बरसात के कारण खराब हुई उनकी धान की फसल का मुआवजा दिया जाए। इस बारे में लाडवा के खंड विकास व पंचायत अधिकारी कंवरभान नरवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में अभी ऐसा कोई मामला नहीं आया है।
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