- नागरिक अस्पताल में आए हर 100 में से 70 लोगों ने पहली बार सहपाठी या सहकर्मी के साथ किया था नशा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सहपाठियों और सहकर्मियों के दबाव में बच्चे और युवा नशे के जाल में फंस रहे हैं। नागरिक अस्पताल में पहुंच रहे नशे के मरीजों की काउंसलिंग में सामने आया है कि नशा करने वाले हर 100 मरीजों में से 70 ने अपने सहपाठियों या सहकर्मियों के दबाव में पहली बार नशा किया था। जिसके बाद से उन्हें इसकी आदत हो गई और वे प्रतिदिन नशा करने के आदी हो गए।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि सह कर्मियों के दबाव (पीर प्रेशर) के अलावा युवाओं में नशे की आदत के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवांशिक प्रवृति, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक वातावरण, शिक्षा की कमी, सामाजिक-आर्थिक कारण, दुखद घटनाएं व बचपन के दुखद अनुभव शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि पीर प्रेशर केवल एक पहलू होता है। वहीं, युवाओं को नशीले पदार्थों का उपयोग करने की ओर बढ़ने के लिए प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि डिप्रेशन, चिंता के कारण युवा नशीली दवाओं का उपयोग करने की ओर बढ़ सकते हैं। वहीं, जागरूकता की कमी से भी बच्चे व युवा नशा करने लग जाते हैं।
क्या है पीर प्रेशर
क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट संतोष व विकास ने बताया कि पीर प्रेशर का मतलब है कि अपने ही ग्रुप के सदस्यों द्वारा बनाया गया दबाव। यह दबाव तब होता है जब एक ही समूह के सदस्य अन्य सदस्यों को ऐसे काम करने के लिए प्रभावित करते हैं, जबकि वह ऐसा नहीं करना चाहते।
पीर प्रेशर के लक्षण
डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि माता-पिता के साथ कभी अच्छा तो कभी बुरा व्यवहार करना। नए-नए दोस्त बनाना। स्कूल न जाना। नींद से जुड़ी समस्या होना। खाने से जुड़ी समस्या होना। तनाव महसूस करना। शरीर की बनावट। कपड़ों आदि पर ज्यादा चिंता करना। बच्चों का आक्रामक व्यवहार करना अन्य लक्षण शामिल हैं।
पांच बच्चे पहुंचे नशा मुक्ति केंद्र
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी ओपीडी में 14-15 साल के पांच बच्चे पहुंचे और उन्होंने उन्हें बताया कि वह चरस व इंजेक्शन का नशा करते हैं। जब उनकी काउंसलिंग शुरू की गई तो पता चला कि पांचों बच्चे करीब दो-तीन साल से एक साथ एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। इनमें से एक ने किसी बाहरी सदस्य के साथ नशा शुरू किया और बाद में अपने समूह में एक-एक करके सबको नशे का आदि बनाया। इनमें से दो ने नशा करने से मना किया तो उन्होंने दोस्ती की कसम देकर सिर्फ एक बार नशा करने के लिए दबाव बनाया तो दोनों ने एक बार नशा कर लिया। जिसके बाद से वे एक साथ नशा करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार नशा किया तो मन को खुशी और अपने आपको दुखों से दूर पाया। ऐसे में वे नशे के आदी हो गए।