अंबाला। हम 75 वर्षों में अपने कोई भी वास्तविक रूपों को वापस क्यों नहीं ला सके,कहां कमी रह गई, बेटी, पत्नी और मां बनकर सभी जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई, फिर भी अस्तित्व को हासिल करने का सिलसिला जारी है।
उक्त वक्तव्य अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज में आयोजित संवर्धिनी समागम के दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ अमृता दीदी ने दी। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित किया कि वो अपने दम पर समाज में एक ऐसा स्थान बनाएं जोकि एक विशेष पहचान हो। उन्होंने सावित्री की कहानी सुना कर महिलाओं को एक संदेश दिया कि शकुंतला ने बड़े स्वाभिमान के साथ अपने पुत्र भारत के नाम पर भारत देश को नाम की संज्ञा दी और कहा कि हर मां शिवाजी जैसे पुत्र को वर्तमान में जन्म दे। कार्यक्रम माधव राष्ट्र सेवा समिति के तत्वाधान में हुआ।
तीन सत्रों में चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रथम सत्र में भारतीय चिंतन में महिला, द्वितीय सत्र में वर्तमान में महिलाओं की स्थिति,समस्याएं और समाधान और तृतीय सत्र में भारत के विकास में महिलाओं का योगदान विषयों पर गणमान्यों और मुख्य वक्ताओं ने व्याख्यान दिया।मुख्य अतिथि रेखा शर्मा जी ने बताया कि शिव को अर्धनारीश्वर के रूप में माना जाता है।
भारतीय चिंतन में शक्ति को मां कहा जाता है और नो दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मुख्य वक्ता डॉ. चारु कालरा ने कहा, भारतीय चिंतन कभी भी स्त्री प्रधान या पुरुष प्रधान नहीं रहा, ऋग्वेद में नारी को ब्रह्म शब्द से सुशोभित किया गया है। द्वितीय चर्चा सत्र में दर्शक दीर्घा में बैठी बहनों से उनकी जिज्ञासा जानी और मंच पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी चर्चा प्रवर्तकों ने उनका उत्तर दिया। तृतीय सत्र का विषय था भारत के विकास में महिलाओं का योगदान था। इसकी अध्यक्षता डॉ. आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर डॉ. विनय कपूर ने की।
उन्होंने कहा, हम क्या थे, क्या हैं और क्या होना है। पश्चिमी संस्कृति में आज भी महिला को दूसरा स्थान दिया जाता है। तृतीय सत्र की विशिष्ट अतिथि रोटरी क्लब पंचकूला से वीटा शर्मा रही। मुख्य वक्ता रेणु पाठक ने कहा कि भारत की भूमि वीरांगनाओं की भूमि है। हमें अपने भारतवासियों और अपने ऊपर हमेशा गर्व करना चाहिए।
कार्यक्रम में विभाग संयोजिका डॉ प्रतिभा सिंह ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की। संवर्धिनी समागम में प्रेरणादायी महिलाओं की तरफ से वैदिक साइंस की प्रदर्शनी लगाई गई और दूरदराज के गांव में स्वयं सहायता समूह से अपनी आजीविका चलाने वाली बहनों ने सुंदर-सुंदर स्टाल लगाए। समागम में प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने का संदेश दिया गय। इस मौके पर विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं और हरियाणा कला परिषद के कलाकारों द्वारा सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। सह संयोजक मीनाक्षी द्वारा अतिथि परिचय कराया गया और अंत में विभाग सह संयोजिका नीता खेड़ा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।