हजरत जिंदा पीर रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर सालाना उर्स में बाबा की शान में कसीदे पढ़ते कव्वाल।
इंद्री। सामने आओगे या आज भी पर्दा होगा.. लाल मेरी पत रखियो सदा झूले लालन...कव्वालियों के साथ ही हजरत जिंदा पीर रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर सालाना उर्स व भंडारे का समापन हो गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए कव्वाल उमर दराज चिश्ती व साजिंदों ने कव्वालियों के जरिये पीर बाबा की शान में कसीदे पढ़े। दरगाह के मुर्शिद दूर-दूर से उर्स मुबारक के मौके पर पीर बाबा की दरगाह पर पहुंचे और सलामती की दुआ मांगी। कार्यक्रम का शुभारंभ दरगाह पर चादर पोशी कर हुआ। उसके बाद लंगर का आयोजन हुआ, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संवाद