करनाल। नेत्रदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि इससे दृष्टिहीन व्यक्तियों का दुनिया देखने का सपना पूरा होता है। दृष्टिहीन व्यक्तियों के इस सपने को साकार करने में जिला नागरिक अस्पताल जुटा हुआ है। जागरूकता के माध्यम से पिछले तीन साल में 1771 लोगों ने स्वयं आगे आकर प्लेज फॉर्म यानी मृत्यु के बाद आंखें दान करने वाला फार्म भरा है।
इसके लिए नागरिक अस्पताल की आंखों की ओपीडी में पिछले तीन साल से नेत्र दान सलाहकार तैनात किया गया है। जो विभिन्न सेमिनारों, जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं। जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र दान सलाहकार सुमन रानी ने बताया कि देशभर में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो आंख में चोट, धब्बे व जन्मजात दृष्टिहीनता के शिकार हैं। इसका एक मात्र उपचार नेत्र दान ही है। जिससे दृष्टिहीनता को दूर किया जा सकता है। ऐसे में नेत्र दान के लिए लोग जागरूक होकर कई लोगों की जिंदगी में रोशनी ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेमिनार, शिविर आयोजित किए जाते हैं।
कौन कर सकता है नेत्र दान
नेत्र दान सलाहकार सुमन रानी ने बताया कि किसी भी उम्र का व्यक्ति जिसका कॉर्निया पूरी तरह से स्वस्थ हो, वह नेत्र दान कर सकता है। वैसे 10-50 वर्ष के व्यक्तियों की आंखें ज्यादा उपयोगी होती हैं। इसके अलावा दुर्घटना, हार्ट अटैक, लकवा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज अस्थमा और मूत्र संबंधी रोग के कारण मौत होने पर आंखों का प्रयोग प्रत्यारोपण के लिए किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों की मृत्यु वायरल, बैक्टीरियल इंफेक्शन या एड्स की वजह हुई हो तो उनकी आंखों के कॉर्निया का प्रयोग नेत्र दान के लिए नहीं किया जा सकता है।