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Karnal News: स्मैक के दोषी ने असमर्थता जताई तो जज ने भर दिया जुर्माना

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- दोषी ने दिया गरीबी का हवाला, कहा- अब कभी नशा नहीं बेचूंगा, मेरे पास जुर्माना भरने के लिए नहीं हैं रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने जज के नाते नशा तस्करी के दोषी को सजा सुनाई और जुर्माना लगा दिया। जब दोषी ने जुर्माना राशि भरने में असमर्थता जाहिर की तो जज ने दोषी की जुर्माना राशि अपनी जेब से भर दी। दोषी राजू निवासी बूढ़ा खेड़ा, करनाल को पुलिस ने 20 मार्च 2021 को 6.35 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने थाना 32-33 में मामला दर्ज कर आरोपी को अदालत में पेश किया। जहां अदालत ने उसे जेल भेज दिया। आरोपी राजू को पांच महीने बाद 19 अगस्त 2021 को अदालत से जमानत मिल गई। यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था।
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जुर्म कबूल कर मांगी माफी
पेशी पर पहुंचे आरोपी राजू ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की कोर्ट में जुर्म कबूल कर लिया।अदालत ने दोषी राजू को पांच महीने की सजा और एक हजार रुपये जुर्माने के रूप में अदा करने के आदेश दिए और जुर्माना न भरने की स्थिति में दो महीने की कारावास से दंडित किया, तो दोषी राजू ने जज से रहम करने की अपील की। दोषी ने कहा कि वह मजदूरी करता है, उसके माता-पिता का भी देहांत हो चुका है।
परिवार में पत्नी के साथ उसके दो व पांच साल के दो बच्चे हैं। वह घर में अकेला ही कमाने वाला है। वह जुर्माना राशि नहीं भर सकता। उसने कहा कि वह भविष्य में कभी भी नशे के कार्यों में संलिप्त नहीं होगा। दोषी का पूर्व का आपराधिक रिकाॅर्ड भी नहीं था। उसकी बात सुनकर जज ने स्वयं अपनी जेब से 1000 रुपये जुर्माने के तौर पर अदालत में दिए। ऐसे में दोषी को दो महीने की जेल की सजा काटने से राहत मिल गई।
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अदालत में ऐसे बहुत कम मामले देखने को मिलते हैं, जहां जज किसी गरीब दोषी व्यक्ति का जुर्माना स्वयं भरकर व उसे सही राह पर चलने की नसीहत देता है। वास्तव में जज ने अपनी जेब से जुर्माना भरने का जो कार्य किया है, वह अदालत में एक नई मिसाल है। दोषी की आपराधिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति व अन्य कई पहलुओं को जांच कर जज पूरे विवेक से निर्णय लेता है।
- डॉ. पंकज, उप-निदेशक, अभियोजन-कम-जिला न्यायवादी करनाल
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