- योजना पर नहीं हुआ काम, 12.52 फीसदी बढ़त की बजाय 3.19 प्रतिशत पिछड़ा करनाल
- प्रदेश में 17वें से 15वें रैंक पर आए, सात साल बाद हरियाणा के टॉप-3 में बनाई जगह
गगन तलवार
करनाल। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम को पिछले साल से 12.52 प्रतिशत बढ़ाकर 80 फीसदी लाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इस लक्ष्य के लिए प्रदेश के शिक्षा विभाग के अधिकारी परीक्षाओं से महज 42 दिन पहले ही जागे। अतिरिक्त कक्षाओं सहित अन्य कई तरह की योजनाएं बनाई गई पर स्कूलों की ओर से इन पर काम न होने से बढ़त की बजाय परीक्षा परिणाम इस बार 3.19 फीसदी घट गया। ऐसे में नया लक्ष्य बनाने के अरमान अधिकारियों और शिक्षकों की लापरवाही के कारण धरे रह गए।
बोर्ड परीक्षा परिणाम प्रदेश भर में इस बार पिछले साल के मुकाबले कम रहा है। ऐसे में प्रदेश स्तर की रैंकिंग में करनाल 17वें से 15वें पायदान पर आया है। यानी अन्य जिलों की तुलना में करनाल की स्थिति इस बार कुछ ठीक है। वहीं, सात साल बाद करनाल ने हरियाणा के टॉप-3 विद्यार्थियों में भी जगह बनाई है। बोर्ड की परीक्षाएं 27 फरवरी से शुरू हुई थी, जबकि 16 जनवरी को एसीएस डॉ. महावीर सिंह ने करनाल के डॉ. मंगलसेन सभागार में प्रदेश भर के स्कूल मुखियाओं की बैठक बुलाकर उन्हें नया लक्ष्य दिया था। प्रिंसिपलों ने भी बढ़े दावे किए थे लेकिन परिणाम बढ़ाने में सभी असफल रहे। इसके लिए अधिकारियों की निगरानी में जिला, खंड और गांव स्तर पर कमेटियां भी बनाई गई थी। ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी परिणाम घटने के कारणों को ढूंढने में जुट गए हैं। कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों के घटे परिणाम की समीक्षा की जा रही है।
2016 के बाद अब चमका प्रदेश में नाम
10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में पिछले पांच वर्षों में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन प्रदेश स्तर पर पिछले सात साल से किसी भी विद्यार्थी ने खास प्रदर्शन नहीं किया है। 2016 के बाद इस बार छात्रा ज्योति रानी ने टॉप-3 में जगह बनाई है। कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम में भी आठ साल बाद गत वर्ष से लगातार इस बार भी दूसरी बार करनाल से टॉपर निकला।
2017 के मुकाबले 22.94 प्रतिशत परिणाम बढ़ा
वहीं बोर्ड द्वारा जारी परीक्षा परिणाम की सूची में करनाल का नाम 15वें नंबर पर है। जबकि 2022 में 17वें और 2020 में करनाल 16वें पायदान पर था। 2021 में बिना परीक्षा सभी विद्यार्थियों को पास कर दिया गया था। पिछले सात सालों के रिकाॅर्ड में 2017 में सबसे खराब 41.35 प्रतिशत परिणाम रहा था, तब से सुधार के साथ अब तक 22.94 फीसदी परिणाम बढ़ा है।
यह है स्थिति
वर्ष
पास (प्रतिशत में )
2023
64.29
2022
67.48
2021
100 (बिना परीक्षा सब पास)
2020
62.46
2019
50.28
2018
43.66
2017
41.35
2016
51.49
नोट : बॉक्स के साथ ही टेबल लगाएं
छह साल बाद बेटियों का परिणाम भी घटा
हर साल बेटियों के परीक्षा परिणाम में काफी सुधार नजर आया, लेकिन इस बार बेटियों का परिणाम गत वर्ष से एक प्रतिशत घटा है। 2022 से पिछले पांच सालों से छात्राएं हर बार परिणाम में बढ़त हासिल कर रही थी। सर्वाधिक बढ़ोतरी 2019 में हुई थी। उस समय 2018 के मुकाबले 17.54 प्रतिशत ज्यादा परिणाम बेटियों का रहा जबकि 2017 के मुकाबले 2018 में महज 1.14 प्रतिशत ही बढ़ोतरी हुई थी।
किस वर्ष कितना रहा बेटियों का परीक्षा परिणाम
वर्ष
परिणाम
स्थिति
2023
71.01
01 (घटत)
2022
72.01
03.01 (बढ़त)
2020
69
04 (बढ़त)
2019
65
17.54 (बढ़त)
2018
47.46
01.14 (बढ़त)
2017
46.32
-
नोट : 2021 में बिना परीक्षा विद्यार्थियों को पास किया गया।
बॉक्स
लड़कों से 13.31 प्रतिशत आगे बेटियां
परीक्षा परिणाम में बेटियां इस बार भी बेटों से आगे हैं। लड़कों से 13.31 प्रतिशत ज्यादा बेटियां पास हुई हैं। लड़कों का रिजल्ट 57.70 और लड़कियों का परिणाम 71.01 फीसदी है।
स्थिति लड़के लड़कियां
कुल
7472
7340
पास
4311
5212
कंपार्टमेंट
1016
829
फेल
2145
1299
प्रतिशत
57.70
71.01
बोर्ड का परीक्षा परिणाम 64.29 प्रतिशत रहा है। पिछले साल से परिणाम कुछ कम है। अभी और परिणाम सुधारने के लिए हमें काम करना होगा। विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी और मेहनत करनी होगी। जो विद्यार्थी असफल रहे हैं, वे और मेहनत करके आगे बढ़ें। सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं।
- राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी