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Karnal News: चोट के बाद की वापसी, उज्बेकिस्तान में चमकेंगे बॉक्सर सूर्या

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मुकेश राणा
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करनाल। उज्बेकिस्तान के ताशकंद में होने वाली पुरुषों की विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में करनाल के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज निशांत देव उर्फ सूर्या अपनी चमक दिखाएंगे। 30 अप्रैल से 14 मई तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में 104 देशों से 640 बॉक्सर दम दिखाएंगे। निशांत देव का चयन 71 किलोग्राम भारवर्ग में किया गया है।

सूर्या के पिता पवन देव ने बताया कि बेटे ने चोट के बाद रिंग में वापसी की है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि वह देश के लिए मेडल जीतेगा। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी स्वर्ण जीता था। ओपीएस विद्या मंदिर में 10 तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी में आईआईएस (इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स) का रुख किया। जहां वह पढ़ाई के साथ-साथ बॉक्सिंग की बारीकियां भी सीख रहे हैं। वर्ष 2016-17 में उनके कोच यूएसए रॉन और अब वर्तमान में यूके के कोच जाॅन उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। वहां पर बीएससी फाइनल इयर की पढ़ाई भी कर रहे हैं।
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सूर्या अब तक जिलास्तर, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि निशांत की वर्ल्ड रैंकिंग सात है जबकि इंडियन रैंकिंग नंबर एक है। विदित हो कि भारत की ओर से इस प्रतियोगिता में 13 बॉक्सर भाग ले रहे हैं, जिनका प्रतिनिधित्व बॉक्सर शिवा थापा कर रहे हैं। घर में निशांत के किसान पिता पवन देव, माता प्रियंका गृहिणी, एक बड़ा भाई, दादा चौधरी कृष्ण देव, दादी रोशनी देवी व चाचा-चाची हैं। जिनका हर कदम पर उन्हें साथ मिलता है।



मामा के पोस्टर से जागी बॉक्सर बनने की जिज्ञासा

पिता पवन देव ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। बढ़ा बेटा कनाडा में पीएचडी कर रहा है। निशांत को बचपन में अपने मामा के पोस्टर देख बॉक्सर बनने की जिज्ञासा हुई। जब आठ साल के हुए तो राजौंद के बॉक्सर मनोज के कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने पूरी तरह से बॉक्सर बनने की ठान ली। कर्ण स्टेडियम के बॉक्सिंग रिंग में उतरे तो कोच सुरेंद्र चौहान ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देना शुरू किया। तीन साल की कड़ी मेहनत के साथ रिंग में उतरे तो पांच सालों तक जिले में अव्वल रहे। जहां पर उन्होंने सब जूनियर, जूनियर, यूथ गेम और अन्य प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल प्राप्त किए।



दादा-दादी को है पोते पर नाज



सूर्या के दादा चौधरी कृष्ण देव और दादी रोशनी का कहना है कि उन्हें अपने पोते पर नाज है। जो बॉक्सिंग टीम में देश के लिए खेल रहा है। उनका कहना है कि उनका पोता हर चीज को बड़ी शिद्दत से करता है। बड़ी खुशी होती है कि उनके पोते ने कोट मोहल्ले की तंग गलियों से निकलकर इंटरनेशनल बॉक्सर बनने तक का सफर छोटी उम्र में ही तय कर लिया। अभी वह 22 वर्ष के हैं। वे पोते के लिए प्रार्थना करेंगे कि वह अपने भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम चमकाए।
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देश के 13 बॉक्सरों में शामिल



बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि उज्बेकिस्तान के ताशकंद में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत की ओर से 13 बॉक्सर चयनित किए गए हैं। जिनमें गोविंद साहनी (48 किग्रा), दीपक भोरिया (51 किग्रा), सचिन सिवाच (54 किग्रा), मोहम्मद हसमुद्दीन (57 किग्रा), वरिंदर सिंह (60 किग्रा), शिव थापा (63.5 किग्रा), आकाश सांगवान (67 किग्रा), निशांत देव (71 किग्रा), सुमित कुंडू (75 किग्रा), आशीष चौधरी (80 किग्रा), हर्ष चौधरी (86 किग्रा), नवीन कुमार (92+ किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (92+ किग्रा) शामिल हैं। प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने पर दो लाख, सिल्वर एक लाख और रजत पदक जीतने पर 50 हजार डॉलर का इनाम है।
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