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Karnal News: निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज बंद

Wed, 16 Oct 2024 06:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। गत दिनों रिश्वतखोरी के मामले में आयुष्मान भारत योजना के डिप्टी सीईओ डॉ. रवि की गिरफ्तारी के बाद करनाल के निजी अस्पताल ने व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। वहीं दूसरी ओर जिले के आयुष्मान पैनल से जुड़े निजी अस्पतालों के 18 करोड़ रुपए सरकार की तरफ अटके हुए हैं। इनका भुगतान न होने व कुछ अन्य मांगें पूरी न होने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन करनाल (आईएमए) ने तुरंत प्रभाव से कार्डधारकों का उपचार नहीं करने की घोषणा कर दी है।
जिलेभर के करीब साढ़े सात लाख आयुष्मान कार्डधारक हैं। ऐसे में इनमें से कोई गंभीर बीमार होता है तो उसके आगे निशुल्क उपचार का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में जिले के साढ़े सात लाख आयुष्मान कार्ड धारकों को पैनल वाले निजी अस्पतालों में अब कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। आईएमए करनाल के जिला प्रधान रोहित सदाना ने कहा कि आयुष्मान योजना सरकार की तरफ से एक अच्छी पहल है।
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सभी निजी अस्पताल के डॉक्टर्स इस योजना का समर्थन भी करते है लेकिन योजना को लागू कराने वाले अधिकारी भ्रष्टाचार नीतियों के तहत इस योजना को आमजन तक नहीं पहुंचा रहे है। इस समय करनाल में योजना को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि जब तक अधिकारियों द्वारा हॉस्पिटल को इस स्कीम को चलाने में जो दिक्कत आ रही हैं उसे ठीक नहीं किया जाएगा तब तक आयुष्मान स्कीम के तहत इलाज बंद रहेगा। उन्होंने बताया कि हालांकि जिले में निजी अस्पतालों में छह अक्तूबर से बंद किया हुआ है, वहीं आधिकारिक रूप से 15 अक्तूबर से इलाज को बंद किया गया है।
आईएमए जिला प्रधान रोहित सदाना ने बताया कि भ्रष्ट अधिकारियों ने योजना में इलाज करने से लेकर अस्पतालों की बकाया राशि आबंटन तक जो नियम बनाए है वो सीधा-सीधा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले हैं। हाल ही में सीईओ आयुष्मान स्कीम हरियाणा पेमेंट्स व पैनल बद्धता के लिए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए हैं।
इससे साबित होता है कि कहीं न कहीं ये भ्रष्टाचार और रिश्वत का खेल, इस योजना में जड़े पकड़ चुका है। आयुष्मान पोर्टल पर मरीज की आधिकारिक आज्ञा लेने के बाद इलाज कराया जाता है। उसके बाद महीनों तक पेमेंट न आने से या राशि के कट के आने से अस्पतालों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है।
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हड़ताल के बावजूद नहीं कोई सुधार
विदित है कि पिछले एक साल में लगभग दो-तीन बार इस योजना की खामियां बताने के लिए हड़ताल भी की गई लेकिन इस योजना में सुधार लाने के लिए कोई बड़ा कदम अधिकारियों द्वारा नहीं उठाया गया। सरकार से तुरंत प्रभाव से एक्शन में आने का और इस योजना को सुचारू रूप से चलाने में अस्पताल का सहयोग करने की मांग पर अड़ी है। सिस्टम की इस कमी को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि निजी अस्पताल इस योजना के तहत फिर से इलाज शुरू कर सके।
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