फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बसों की छतों पर किया सफर, जाम से जूझा शहर

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) देने वाले अभ्यर्थियों के लिए बसों की व्यवस्था होेने के बावजूद उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं आम यात्री भी अपने गंतव्य तक जाने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। जाम के चलते शहर में दिनभर वाहन रेंगते रहे। हालात ऐसे हो गए कि परीक्षा देने के लिए तो अभ्यर्थी किसी तरह बसों में लटक कर और छतों पर बैठकर पहुंच गए लेकिन परीक्षा खत्म होने के बाद भीड़ और जाम में फंसने के कारण वे अपनी बसों तक पहुंच ही नहीं पाये और बसें उन्हें छोड़कर निकल गईं। कई अभ्यर्थियों को यह भी पता नहीं चला कि उनकी बस कहां खड़ी है। क्योंकि बस चालकों ने बसें भी जहां-तहां सड़कों पर खड़ी कर दी थी। महिला अभ्यर्थियों तक को बसों की छतों पर बैठकर और लटक कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
बसों को सड़कों पर ही कर दिया खड़ा
अभ्यर्थियों को सेंटर तक छोड़ने के बाद चालकों ने बसों को शहर के अंदर सड़कों पर ही खड़ा कर दिया। जिससे सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक लगभग सभी परीक्षा केंद्रों और चौक चौराहों पर जाम की स्थिति बनी रही। जिसको खुलवाने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
विज्ञापन

दो घंटे तक भी नहीं मिली बसें
सरकार ने हर डिपो की बसों को परीक्षा की ड्यूटी में लगा दिया। जिसके चलते रोजाना बसों से आवाजाही करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। शहर के अलावा जिले के लगभग सभी कस्बों के बस स्टैंड पर भारी संख्या में आम यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। इन लोगों को डेढ़ से दो घंटे तक बस नहीं मिल पाई, क्योंकि जो बसें कस्बों के बस स्टैंड पर पहुंच रही थी, वे ओवरलोड थी।
निजी वाहन का लिया सहारा
कुरुक्षेत्र से आई पूजा ने बताया कि सरकार ने निशुल्क बस सुविधा दी थी, लेकिन जब वह सुबह बस स्टैंड पर पहुंची तो सभी फुल थी। ऐसे में भीड़ को देखकर तुरंत अपने पति को फोन किया और उनके साथ बाइक पर बैठकर सेंटर तक आना पड़ा।
बैठने की नहीं मिली जगह
गोहाना से आई गायत्री ने बताया कि सुबह पांच बजे वह गोहाना बस स्टैंड पहुंच गई थी। जिसके बाद उसे लगभग छह बजे बस मिली, लेकिन इसमें गोहाना से लेकर करनाल तक खड़े होकर सफर करना पड़ा। समय पर स्टैंड पर पहुंचने के बावजूद बस में बैठने की जगह नहीं मिली जिससे काफी परेशानी हुई।
कहां खड़ी है बस पता ही नहीं
कैथल से आए अभ्यर्थी संजीव कुमार ने बताया कि सीईटी की परीक्षा बेहतर रही। सभी सवाल हरियाणा से जुड़े हुए थे, लेकिन अब उसे घर जाने की समस्या है। सुबह तो जैसे-तैसे बस में लटक कर आ गए थे। लेकिन उस बस का अब कुछ पता नहीं है। वह कहां खड़ी है। उसके साथी भी इधर-उधर हो गए हैं।
छत पर की यात्रा
जींद से आई रितु ने बताया कि सरकार ने अभ्यर्थियों के लिए बस की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन अव्यवस्था का आलम रहा। महिला अभ्यर्थियों को बस की छतों पर सफर करना पड़ा। सरकार को महिलाओं के लिए विशेष बस चलानी चाहिए थी। जिससे व्यवस्था खराब नहीं होती।
विज्ञापन

निकल गई बस
जींद से आए अभ्यर्थी मनदीप ने बताया कि जब परीक्षा खत्म हुई तो शहर में भारी जाम लग गया। ऐसे में वह सुबह जिस बस से करनाल आया था और वह जहां खड़ी थी वहां पहुंचने में थोड़ी देर हो गई। ऐसे में बस चालक कुछ अभ्यर्थियों को छोड़कर लौट गया अब वह अन्य साधन ढूंढ रहे हैं।

64: अग्रसेन चौक पर गांव गगसीना के ग्रामीणों द्वारा लगाए गये जाम के कारण परेशान यात्रियों को पैदल ही

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें