पहली से 12वीं तक हर बार कक्षा में प्रथम रही कर्ण नगरी की जसमीत
- टैक्सी चालक पिता और निजी स्कूल की शिक्षिका मां की बेटी रही प्रदेश में द्वितीय, आर्थिक तंगी में भी मेहनत कर पाई सफलता, सीए बनना सपना
गगन तलवार
करनाल। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम में कर्णनगरी की जसमीत कौर 497 अंक लेकर प्रदेश में द्वितीय स्थान पर रही है। पहली से 12वीं कक्षा तक हर बार अपने स्कूल में प्रथम रहने वाली बेटी की इस उपलब्धि पर स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल है। इस बेटी का सीए बनने का सपना है। इसके लिए उसने अभी से मेहनत शुरू कर दी है।
संत निक्का सिंह पब्लिक स्कूल निर्मल धाम से अब तक निशुल्क पढ़ी इस बेटी का परिवार आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा है। टैक्सी ड्राइवर पिता हरविंद्र पाल सिंह और शिक्षिका मां मनजीत कौर की प्रेरणा से वह इस मुकाम तक पहुंची है। अब सीए बनने का सपना पूरा करने के लिए बेटी यू-ट्यूब से वीडियो देखकर सेल्फ स्टडी कर रही है। अमर उजाला से बातचीत में छात्रा ने बताया कि उसने सेल्फ स्टडी के दम पर सफलता पाई है। परीक्षा को उसने कभी तनाव के रूप में नहीं लिया।
पिछले दिनों एक निजी शिक्षण संस्थान की ओर से आयोजित हुई छात्रवृत्ति की परीक्षा पास करके भी उसने 11 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त की है। छात्रा की इस उपलब्धि पर स्कूल में प्रिंसिपल कविता अरोड़ा ने ढोल बजवाकर खुशी मनाई। कॉमर्स संकाय की इस छात्रा के एकाउंट्स, बिजनेस स्टडी और सीपीयू में 100 अंक, अर्थशास्त्र में 99 और अंग्रेजी में 98 अंक हैं। छात्रा ने अन्य विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और मोबाइल का पढ़ाई के लिए ही इस्तेमाल करने का संदेश दिया।
परिवार की आर्थिक मदद के लिए कर रही नौकरी
वह परिवार की मदद के लिए 12वीं की परीक्षाओं के बाद से फाइनेंस कंपनी में नौकरी कर रही है। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। पिता हरविंद्र पाल सिंह ड्राइवर हैं और माता मनजीत कौर प्राइवेट स्कूल में टीचर है। चूंकि माता टीचर है, परीक्षा देने के बाद वह खाली थी तो उसने भी एक प्राइवेट कंपनी मे नौकरी शुरू की थी ताकि अपने परिवार का गुजारा ठीके से हो सके और उसके छोटे भाई की पढ़ाई भी अच्छे से हो सके।
सत्र के पहले दिन से अंत तक बराबर की पढ़ाई
जसमीत ने बताया कि उसे घर और स्कूल से सही मार्गदर्शन मिला। सभी विषयों पर जसमीत की अच्छी पकड़ रही और उसने 10 घंटे तक अपनी पढ़ाई पर मेहनत की। उसकी मेहनत एक दिन की नहीं है। बल्कि सत्र की शुरुआत के पहले दिन से अंत तक उसने बराबर पढ़ाई को समय दिया। स्कूल में जो सिखाया गया उसे ध्यान से समझा। जो होमवर्क दिया गया उसे सही तरीके से किया। सोशल मीडिया को पढ़ाई में हथियार बनाया।