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Karnal News: ब्लाइट बीमारी की चपेट में टमाटर की फसल, किसान चिंतित

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- तरावड़ी क्षेत्र में किसानों की करीब 500 एकड़ टमाटर की फसल प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। कई दिनों से खराब मौसम का टमाटर की फसल पर बुरा असर पड़ा है। तरावड़ी के आसपास के गांव पधाना, गांगर, सीकरी, खेड़ीमान सिंह, तखाना के क्षेत्र के किसानों की करीब 500 एकड़ में लगी टमाटर की फसल ब्लाइट बीमारी की चपेट में है। जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
बताते हैं कि कई दिनों से सूरज न निकलने व ठंड की वजह से टमाटर के पौधों पर पड़ी फंगस बनी बीमारी सभी फसलों में फैलती नजर आ रही है, लेकिन टमाटर की फसल नाजुक होने के कारण इस पर इसका अधिक असर पड़ रहा है। पधाना गांव के सोनी, बोबी, धूमसिंह व गांगर गांव के परवीन, बिटटू राणा, बबलू राणा, प्रदीप किसानों का कहना है कि टमाटर की फसल को बचाने के लिए हर-चार दिन के बाद खेत में फंगीसाइड दवाई का स्प्रे किया जा रहा है। जिस पर प्रति एकड़ पांच हजार रुपये खर्च आता है और हाइब्रिड टमाटर तो अभी मार्च में टूटना शुरू होगा। जिसे बचाने के लिए किसानों को काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
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किसानों ने बताया कि तरावड़ी के आसपास के कई गांवों में लगभग 3000 एकड़ जमीन में टमाटर की पैदावार होती है। ब्लाइट बीमारी का असर टमाटर की लगभग 90 प्रतिशत फसल पर हो रहा है। इसे बचाने के लिए टमाटर पर दवाई का स्प्रे किया जा रहा है। ध्यान न देने पर बीमारी एक ही रात में टमाटर को काला कर देती है बीमारी के कारण उत्पादन भी कम हो रहा है। किसानों ने बताया कि देसी टमाटर पर इस बीमारी का ज्यादा असर है। देसी टमाटर की फसल इस समय चल रही है, लेकिन इस बार बीमारी के साथ-साथ उपज भी काफी कम है।
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किसानों ने बताया कि पिछले साल तक एक एकड़ में 28 किलो की एक हजार क्रेट टमाटर निकलता था जो 250 से 300 प्रति क्रेट तक बिकता था। दवाई खर्च निकाल कर सवा लाख रुपया बच जाता था लेकिन इस बार टमाटर की फसल आधी रह गई है और फसल की बीमारी पर पूरा खर्चा हो रहा है, इसलिए किसानों को इस फसल से अबकी बार काफी नुकसान हो रहा है।
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