आगामी प्रतियोगिताओं के लिए कड़ा अभ्यास कर खुद को तैयार कर रहा कर्णनगरी का लाल
मुकेश राणा
करनाल। कर्ण स्टेडियम में कोच सत्यवीर पोसवाल के सानिध्य में तलवारबाजी की बारीकियां सीख रहे राजीव आगामी प्रतियोगिताओं के लिए प्रतिदिन पांच से छह घंटे तक अभ्यास कर रहे हैं। उनकी नजर सितंबर, अक्तूबर में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है, जिसमें वह देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं।
बचपन से ही दिव्यांग राजीव ने कभी अपने आप को कमजोर नहीं समझा। गांव में एक साल तक पावर वेटलिफ्टिंग का कड़ा अभ्यास किया। फिर 15-16 वर्ष की उम्र में ही पावर वेटलिफ्टिंग की बारीकियां सीखने के लिए कर्ण स्टेडियम का रुख किया। तीन सालों तक यहां कड़ी मेहनत की। फिर फेंसिंग कोच के कहने पर व्हीलचेयर तलवारबाजी सीखने लगे। देखते ही देखते उन्होंने एक के बाद एक प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। जिलास्तर पर 25 मेडल जीतने के बाद उन्होंने राष्ट्रीयस्तर पर भी 60 पदक अपने नाम किए हैं। जिनमें स्वर्ण, रजत और कांस्य शामिल है।
लक्ष्य वर्ल्ड कप और एशियन गेम के बाद पैरा ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना
दिव्यांगता को मात देकर कैलाश गांव के राजीव कुमार ने तलवारबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय स्तर पर 60 पदक जीत चुके और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभा का लोहा मनवा चुके राजीव की नजर अब व्हीलचेयर तलवारबाजी वर्ल्ड कप पर है, जो सितंबर माह में दक्षिण कोरिया में होनी है। वहीं अक्टूबर में चाइना में आयोजित होने वाले एशियन गेम पर भी उनकी नजर है। राजीव का कहना है कि वर्ल्ड कप और एशियन गेम के बाद पैरा ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना उनका लक्ष्य है।
संघर्ष-पिता स्कूल में चौकीदार, मां का हो चुका देहांत
कैलाश गांव के एक गरीब परिवार में जन्मे राजीव के पिता पालाराम स्कूल में चौकीदारी का काम करते हैं। परिवार में तीन बहनें और एक भाई है। दो साल पहले माता का देहांत हो चुका है। बचपन से ही दिव्यांग होने के बावजूद राजीव ने हार नहीं मानी और कुछ कर गुजरने की चाहत से ही उन्होंने कर्ण स्टेडियम का रुख किया। यहां पर उन्होंने तीन साल पावर वेटलिफ्टिंग का अभ्यास किया। फिर एक दिन वहां से गुजरते समय फेंसिंग कोच सत्यवीर पोसवाल ने उन्हें अपने पास ट्रेनिंग के लिए आने को कहा। यहीं से राजीव के जीवन में नया मोड़ आया और उन्होंने तलवारबाज बनने की ठान ली।
उपलब्धि-जिलास्तर पर 25 और राष्ट्रीय स्तर पर जीत चुका 60 पदक
राजीव ने अपने खेल सफर की शुरुआत 2012 कर्ण स्टेडियम से की। वह अब तक जिलास्तर पर 25 और राष्ट्रीय स्तर पर 60 पदक जीत चुका है। इसके अलावा 2019 नीदरलैंड, 2021 इटली, 2022 में थाइलैंड, पोलैंड और इसी वर्ष कॉमनवेल्थ व्हीलचेयर फेंसिंग प्रतियोगिता में भी भाग ले चुका है। कॉमनवेल्थ में वह छठा रैंक भी प्राप्त कर चुका है।
उम्मीद-अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में देश के लिए जीतना है पदक
पिता पालाराम का कहना है कि उनके बेटे ने दिव्यांगता को कभी अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया, हालांकि अभी तक किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। यही कारण है कि वह इंटरनेशनल स्तर पर पदक से चूक गया है, लेकिन उन्हें अपने बेटे की कड़ी मेहनत पर पूरा भरोसा है, जो देश को एक दिन पदक जरूर दिलाएगा। कर्ण स्टेडियम कोच सत्यवीर पोसवाल ने बताया कि राजीव तलवारबाजी में कड़ी मेहनत करता है। हर प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करता है। वह एक दिन देश के लिए मेडल जरूर लेकर आएगा।