हरियाणा के करनाल में नगर निगम की फूसगढ़ स्थित गोशाला नंदी ग्राम में 26 जनवरी की रात 45 गायों को जहर देने वाले गिरोह का मास्टर माइंड तो पुलिस के हत्थे चढ़ गया लेकिन गिरोह का मुखिया अभी फरार है। पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरफ्तार चारों आरोपियों ने तीन साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था, ताकि गोहत्या के पाप से बच सकें।
मुखिया का गिरोह में नाम अमर व शाहबाद की डेहा बस्ती के प्रधान अमित के रूप में जाना जाता है। इधर, पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। जहां से चारों को न्यायालय ने पांच दिन के रिमांड पर भेज दिया है।
करनाल पुलिस ने गोशाला में 45 गायों को जहर देकर मारने के आरोप में कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद की डेहा बस्ती निवासी विशाल, करनाल की मंगल कॉलोनी निवासी रजत, अंबाला कैंट की डेहा बस्ती निवासी सोनू और जम्मू कश्मीर की झुग्गी-झोपड़ी निवासी सूरज को गिरफ्तार किया था।
जिन्हें सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस की मांग पर कोर्ट ने पांच दिन का रिमांड दे दिया है। सीआईए-2 के प्रभारी मोहन लाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पांच दिन की रिमांड मिलने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। उनसे उनका नेटवर्क खंगाला जाएगा, जो करनाल, अंबाला, कुरुक्षेत्र सहित कई जिलों में फैला बताया जा रहा है।
बताया ये भी जा रहा है कि इनके तार उत्तर प्रदेश के हड्डी व खाल माफियाओं से भी जुड़े हैं। जब आरोपियों से पूछा गया कि गाय को मारना पाप है तो उन्होंने बताया कि तीन साल पहले ही उन सभी ने अपना धर्म बदल लिया था, अब वह ईसाई हो गए हैं।
सियासी रसूख का इस्तेमाल कर लिया ठेका
बताते हैं कि शाहबाद की डेहा बस्ती निवासी विशाल इसका मास्टर माइंड है। वह पहले से ही हड्डी खाल के धंधे से जुड़ा है। उसने पहले तो डेहा बस्ती के प्रधान अमित उर्फ अमर को इस धंधे में शामिल किया। उसके प्रभाव व सियासी रसूख का इस्तेमाल करके मृत पशुओं को उठाने, खाल, हड्डी आदि का ठेका लिया और इसके बाद उसने कई साथियों को जोड़कर बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई हड्डी व सींग मिलों से संपर्क स्थापित कर लिया। गोवंश की खाल के धंधेबाजों से भी संबंध स्थापित कर लिए। जांच अधिकारी ने बताया कि अमर उर्फ अमित की तलाश जारी है। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है।
नेटवर्क का खुलासा करने के प्रयास
इधर, कई ऐसे सवाल हैं जो अभी गोवंश को मारने के आरोपियों से जानने हैं। वह कब से और कौन-कौन सी गोशालाओं के संपर्क में हैं, कोई व्यक्ति गोशालाओं का तो नहीं शामिल है। उनके गिरोह में कौन-कौन शामिल हैं, कितने जिलों में या राज्यों में उनका नेटवर्क है। वह खाल व हड्डी कहां बेचते हैं आदि जानकारी हासिल करना अभी बाकी है। यदि सही जानकारी मिल जाती है तो एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो जाएगा।