सनातन धर्म को बुरा कहने वाले मुंह खाएंगे और सीधे हो जाएंगे
- श्री सत जिंदा कल्याणा आश्रम कलानौर के प्रमुख खुशहाल दास महाराज ने सनातन धर्म पर निशाना साधने वालों को आड़े हाथों लिया
- बोले- जो राज पाने के लिए कर रहे उल्टी-सीधे बातें, जल्द ही मिलेगा इन्हें सबक
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्री सत जिंदा कल्याणा आश्रम कलानौर के प्रमुख खुशहाल दास महाराज ने कहा कि जो सनातन है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जो नेता आज सनातन धर्म को बुरा-भला कह रहे हैं, वह जल्द मुंह की खाएंगे और सीधे हो जाएंगे। संत समाज ऐसा नेताओं का कड़ा विरोध करते हैं।
खुशहाल दास जी महाराज करनाल के सेक्टर आठ स्थित श्रीराम मंदिर के स्थापना दिवस पर मुख्य रूप से पहुंचे हुए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने सनातन धर्म पर निशाना साधने वाले नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कमजोर नहीं है, बल्कि ताकतवर है, लोग कमजोर नहीं बल्कि ताकतवर के पीछे ही भागते हैं। हम हजारों साल गुलाम रहे, बहुत सी ताकतों ने सनातन धर्म को खत्म करने की साजिशें रचीं, मगर क्या हुआ ?, कुछ नहीं और आगे उनसे कुछ नहीं होगा। आज तक कोई न तो सनातन धर्म को नुकसान पहुंच सका है और न ही पहुंचा पाएगा। सनातन धर्म हमेशा था, है और आगे भी रहेगा।
महाराज जी ने कहा कि सनातन धर्म पर कोई आंच नहीं आ सकती है और ऐसी सोच के लोग कभी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। उनके अनुसार देश में जितने भी संप्रदाय बने हैं, वे सभी सनातन धर्म का ही तो अंग हैं। जो लोग राज पाने के लिए सनातन धर्म के विरुद्ध उल्टी-सीधे बातें कर रहे हैं, जल्द ही इनको सबक मिल जाएगा। उनका कहना है कि पूरा संत समाज ऐसे लोगों का विरोध करता है और वीर हनुमान जी सब ठीक करेंगे।
सतगुरु ही प्रभु से मिलने का रास्ता
शहर के सेक्टर-आठ स्थित श्री राम मंदिर का वीरवार को स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए खुशहाल दास जी महाराज ने कहा कि सतगुरु ही प्रभु से मिलने का एकमात्र रास्ता है। गुरु ही अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कभी भी मन से हारना नहीं है, मन के जीते जीत और हारे हार है। महापौर रेणु बाला गुप्ता ने भी कार्यक्रम में हाजिरी लगाई। अशोक खुराना मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। भारत विकास परिषद के सदस्यों ने महाराज के हाथों से तुलसी वितरण करवाया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधान अशोक मदान, प्रो.जोंगेंद्र मदान, मुरारी बत्रा, डॉ. के एल डांग, बीआर मदान, पूनम मदान, वेद दुआ, कृष्ण मुखीजा, सोम पोपली, पवन धमीजा, नरेश तनेजा, जगन बत्रा, महेंद्र मोहन बत्रा, संजय बत्रा, सुभाष बत्रा, अशोक बत्रा, राजेश चंद्र आर्य, सुषमा धमीजा, श्याम अरोड़ा, उषा धमीजा, श्याम धमीजा आदि शामिल रहे।