करनाल। दिन में बुलडोजर का कहर आशियानों पर बरपा और रात उजड़े आशियानाें में टूटे सपनों को समेटने में गुजर गई। शहर की वाल्मीकि बस्ती में जहां दिनभर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ( एचएसवीपी ) की कार्रवाई के चलते खलबली का माहौल था, तो रात में यह बस्ती दर्द भरी खामोशी के आगोश में थी। कई लोग जाग रहे थे, तो कुछ उजड़े घरों के आंगन में खुले आसमान तले सबकुछ नियति पर छोड़ सो चुके थे। अमर उजाला की टीम जब मध्यरात्रि इस बस्ती में पहुंची तो वहां का नजारा कुछ अलग था।
बस्ती में कई मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके थे। बाकी मकानों को गिराने के लिए विभाग ने दो दिन का अल्टीमेटम दिया है, इसलिए लोग यहां ज्यादा बेचैन हैं। घर पूरी तरह टूट चुका है, इसलिए बुजुर्ग सत्यवीर दिनभर दुखी रहा। बताया गया कि इसी परेशानी के चलते वह सदमे में रहा और रात को अपने उजड़े आशियाने के आंगन में चारपाई बिछाकर सो गया।
चारों तरफ मेहनत से बनाए गए घरौंदे की ईंटे, दरवाजे, चौखटें व अन्य सामान बिखरा पड़ा था। वहीं, उसके पास ही राजेश के घर की महिलाएं, बच्चे देर रात तक टूटे घर का सामान समेटने में लगे रहे। पूछने पर बताया कि अपने एक रिश्तेदार से बात की है, उन्होंने रात गुजारने के लिए फिलहाल अपने घर बुलाया है। घर की महिलाएं और बच्चे तो सोने चले गए, मगर राजेश मध्यरात्रि तक घर का सामान इकट्ठा करने में लगा रहा।
मध्यरात्रि को अपने घर के आगे खड़े ऋषि ने बताया कि उसके घर के आगे का हिस्सा तोड़ दिया गया है। एक दीवार किसी तरह बची है, क्योंकि उसी दीवार के सहारे रविंद्र, जस्सी, रामधारी, राजिंद्र और हजारी के घर भी टिके हैं, दीवार गिरते ही ये घर भी धराशाही हो जाएंगे। त्रुषि ने कहा कि दिन में काफी खुशामद करने पर विभाग के कर्मचारियों ने फिलहाल ये दीवार को छोड़ दिया गया था, अभी दो दिन का समय है, आगे देखते हैं क्या होता है।
वहीं एक परिवार ऐसा भी दिखा, जिसका पूरा घर टूट चुका था। घर का मुखिया ईंटों को जोड़कर उस पर चादर डाल अपने बच्चों को उसी के नीचे सुलाने में व्यस्त था। वह इस मुद्दे पर अब हमारी टीम से कुछ बात नहीं करना चाहता था। इसी तरह रात को आंखों में नींद नहीं नमी, दिल में दर्द और चेहरों पर उदासी लिए कई लोग रातभर उजड़े घरों में बिखरे सामानों के बीच कुछ ढूंढते और समटते दिखे।