फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: जिस कुएं में नानक ने किया था स्नान, वह आज भी विराजमान

विज्ञापन
विज्ञापन
- ठठियारा मोहल्ले में 1515 ई. में आए थे गुरु नानक देव, जिस बगीचे में विराजे थे वहीं बना है गुरुद्वारा मंजी साहिब पहली पातशाही
विज्ञापन

- पहली उदासी के अंतिम पड़ाव में हुआ था गुरु जी का करनाल आगमन, कई दिन डेरा लगा दिया जनकल्याण का संदेश
- गुरु अमर दास, गुरु हरकिशन और बाबा बंदा बहादुर भी इस स्थली पर आ चुके

गगन तलवार

करनाल। गुरु नानक देव जी 508 साल पहले कर्णनगरी आए थे। अपने करनाल प्रवास के दौरान उन्होंने जिस खुई (कुएं) पर स्नान किया था। उससे आज भी पवित्र जल निकलता है। इस जल से श्रद्धालु स्नान करते हैं। कई दिन तक ठठियारा मोहल्ले में प्रवास कर गुरु नानक जी ने आम जन को जनकल्याण का संदेश दिया था।

ठठियारा मोहल्ले के जिस बगीचे में गुरु जी ने डेरा डाला था, आज उसी जगह पर गुरुद्वारा मंजी साहिब पहली पातशाही बना है। सर्राफा बाजार स्थित यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा संगत की आस्था का केंद्र है। इस पवित्र स्थल पर गुरु अमर दास, गुरु हरकिशन और बाबा बंदा बहादुर भी आ चुके हैं। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी और प्रधान बलकार सिंह के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने इस जगह से लोगों को शांति, सद्भाव कायम करने और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की उन्होंने राह दिखाई। उनके समय का कुआं आज भी यहां बने गुरुद्वारा में विराजमान है। बोहली साहिब के नाम से जानी जाने वाली खुई को गुरु नानक देव जी की चरण छू प्राप्त है। गुरुद्वारे में संगत के ठहरने की भी पूरी व्यवस्था है। दूर-दराज से संगत माथा टेकने के लिए पहुंचती है।
विज्ञापन


पहली उदासी के अंतिम चरण में हुआ था आगमन

गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी अमृतपाल सिंह और प्रधान बलकार सिंह के अनुसार, अपनी चार उदासी में से पहली उदासी (धार्मिक यात्रा) के अंतिम चरण में गुरु नानक देव जी श्यामन (शाम गढ़) से होते हुए सितंबर 1515 में करनाल पहुंचे थे। यहां वे ठठियारा मोहल्ले के उस बगीचे में रुके। उस समय करनाल पर अब्बू अली शाह कलंदर का काफी प्रभाव था। शहर के लोग गुरु नानक देव जी के दर्शनों को आने लगे। इस बात का सैय्यद मुबारक अली शाह को पता चला तो उसने अपने पीर अब्बू अली शाह कलंदर को इसकी सूचना दी।
गुरु नानक देव जी के प्रभाव की कहानी सुनकर वे तिलमिला गए और करामात करने लगे। जब उन्होंने देखा कि उनकी करामातों का असर गुरु नानक देव पर नहीं हो रहा है तो वे अपनी करामातों को छोड़कर पैदल चलकर गुरु जी के पास आए। यहां गुरु नानक देव जी ने पीर अब्बू अली शाह कलंदर को भी उपदेश दिया और दुनिया की भलाई के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन


1709 में यहीं से स्थापित हुआ था जमींदारा राज

गुरु नानक देव जी के बाद इस पवित्र स्थान पर गुरु हरकिशन साहिब दिल्ली जाते हुए 1663 ई. में आए थे। तीसरे पातशाह गुरु अमर दास जी भी इस पवित्र स्थान पर आ चुके हैं। 1709 ई. में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने करनाल शहर को फतह करके यहां जमींदारा राज स्थापित किया था। प्रधान और हेडग्रंथी के अनुसार, सभी गुरुओं की याद में ही यहां गुरुद्वारा स्थापित हुआ। शहर के मुख्य बाजार में स्थापित गुरुद्वारा में सुबह-शाम गुरबाणी का पाठ और कीर्तन होता है। रोजाना श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें