प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में देश के पहले आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी, लेकिन बीते करीब साढे़ तीन साल में 103 एकड़ जमीन पर 500 करोड़ रुपये की लागत बनने वाले इस विवि कैंपस की अभी तक सिर्फ चहारदीवारी ही हो पाई। ऐसे में वीरवार को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की ओर से आकस्मिक निरीक्षण के बाद अब कार्य तेज होने की आस जगी है। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तीन साल की समय सीमा निर्धारित की। साथ ही तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए।
चार जून 2016 को आयुष विश्वविद्यालय की घोषणा के बाद 25 सितंबर 2017 को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके बाद एक मार्च 2018 से कुरुक्षेत्र के सेक्टर आठ स्थित राजकीय आयुर्वेद कालेज में ही विश्वविद्यालय का कार्य शुरू हो गया। फिर 21 जून 2018 को फतुपुर में 103 एकड़ जमीन मिली और 12 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी, लेकिन विवि कैंपस निर्माण की सुस्त चाल के कारण फिलहाल चहारदीवारी का निर्माण कार्य ही पूरा हो पाया है। बुधवार की शाम अचानक राज्यपाल की ओर से आयुष विवि के निरीक्षण का शेड्यूल जारी हुआ और वीरवार की सुबह 11 बजे श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में पहुंचकर उन्होंने आधुनिकतम आयुर्वेदिक लैब का निरीक्षण किया। साथ ही विवि के अधिकारियों को विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो प्रत्येक जिले में आयुर्वेदिक कॉलेज खोला जाए ताकि प्रत्येक बीमार व्यक्ति का इस पद्धति से इलाज किया जा सके। इसके लिए उन्होंने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत आगे बढ़ना का सुझाव भी दिया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोरोना काल में किए गए कार्यों की सराहना की।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान ने बताया कि विश्वविद्यालय को आवंटित 103 एकड़ भूमि की चहारदीवारी का काम पूरा हो चुका है और 500 करोड़ की लागत से विश्वविद्यालय के सभी भवनों के निर्माण के लिए टेंडर भी खोल दिया गया है, जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इस दौरान विधायक सुभाष सुधा, उपायुक्त मुकुल कुमार, पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला, भाजपा के जिलाध्यक्ष राजकुमार सैनी, विश्वविद्यालय के कुलसचिव नरेश भार्गव व डॉ. राजा सिंगला उपस्थित रहे।
राज्यपाल के समक्ष पंचकर्मा विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष मेहता ने विश्वविद्यालय के साथ जुड़े आठ राजकीय सहित 13 कॉलेजों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि नौ शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किया जा चुका है। डॉ. रजनीकांत ने विश्वविद्यालय में किए गए शोध कार्यों, डॉ. मनीष सैनी ने इलेक्ट्रो मेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन सहित अन्य शोध कार्यों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. बलबीर सिंह ने मानवता के लिए कोरोना काल में किए गए कार्यों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।